संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना। पीठाधीश्वर ओमानंद महाराज ने कहा कि जिसको जीवन में भागवत कथा श्रवण लाभ प्राप्त हो जाता है, उसका जीवन सफल, सार्थक और धन्य हो जाता है। भागवत, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की प्रदाता है। भागवत मनुष्य के अंत:करण को पवित्र कर जीवन को ज्ञानमय एवं कीर्तिमय बना देती है।
शुकतीर्थ में भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम स्थित प्रत्यक्षानंद भवन में पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कथा व्यास आचार्य मनोज अवस्थी का सम्मान कर पोथी पूजन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ भागवत अनुष्ठान का शुभारंभ किया।
श्री शुकदेव आश्रम में औरैया के त्रिपाठी परिवार की ओर से आयोजित कथा में पीठाधीश्वर ने कहा कि भागवत मानव जीवन को रसमय, आनंदमय और भक्तिमय बनाने का आधार है। भागवत भारतीय जीवन और संस्कृति की दिव्य आध्यात्मिक विरासत है। यह भगवद रसिकों, भक्तों, सभी सनातनियों को भगवान की ओर से एक दिव्य वरदान और उपहार है। शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को माध्यम बनाकर शुकतीर्थ में गंगा तट पर सिद्ध वटवृक्ष के नीचे बैठकर भागवत महापुराण का सर्वप्रथम प्रचार-प्रसार किया।
कथा से पूर्व तीर्थ में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यजमान योगेश त्रिपाठी, सुरेश चंद्र त्रिपाठी, अखिलेश त्रिपाठी, डाॅ. देवेश त्रिपाठी ने विद्वानों का सत्कार किया। कथा व्यास अचल कृष्ण शास्त्री, आचार्य विकास, ठाकुर प्रसाद मौजूद रहे।