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बैंकों ने उपभोक्ताओं को दिया करारा झटका

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बैंकों ने उपभोक्ताओं को दिया करारा झटका
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मुजफ्फरनगर। केंद्र सरकार ने आम उपभोक्ताओं को छह महीने से लोन की किस्त का पैसा जमा नहीं करने की छूट दी थी। एक सितंबर को समय सीमा पूरी होते ही बैंकों ने छह माह के ब्याज की पूर्ति कर ली। जिनके खाते में पैसा था, ब्याज की कटौती कर ली गई। जिनके खातों में पैसा नहीं मिला, उन्हें नोटिस जारी कर दिए गए। आर्थिक तंगी से जूझ रहा आम आदमी और उद्योग चलाने में परेशानियों का सामना कर रहे उद्यमी इससे सकते में हैं।
छह माह से बैंक में लोन की किस्त नहीं जमा करने वाले लोगों के खातों से सितंबर की पहली तारीख को ही ब्याज की वसूली कर ली गई है। लोगों ने होम लोन, दुकानों, उद्योगों पर ऋण ले रखा है। ऐसे में छह माह की किस्तों का ब्याज काफी बैठ गया है। कुछ लोगों ने परिवार के खर्च के लिए खाते में पैसे जमा किए थे। एक सितंबर को अचानक मेसेज आया कि इतने पैसे कट गए हैं। बैंक जाकर पता किया गया तो जानकारी मिली कि छह महीने का ब्याज एक साथ काट लिया गया है, जिन लोगों के खाते में पैसे नहीं थे। उन्हें बैंक नोटिस जारी कर रहा है।
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बैंक उपभोक्ता हरेंद्र कुमार ने बताया कि बैंक द्वारा ब्याज एक साथ काट लेने से उनका खाता माइनस में चला गया। उन्होंने विद्युत बिल जमा करने और कर्मचारियों की सैलरी के चेक लगाए थे, जो कि खाते में पैसा नहीं होने से चेक बाउंस हो गए। चेक बाउंस होने पर ही पता चला कि खाते से छह माह का ब्याज काट लिया गया। यह प्रक्रिया एसबीआई, पीएनबी, इलाहाबाद बैंक सहित सभी बैंकों ने अपनाई है। जिले में एक साथ काफी लोग इससे प्रभावित हुए हैं। इलाहाबाद बैंक से जुड़े विष्णु अग्रवाल का कहना है कि बैंक के सॉफ्टवेयर ने अपने आप ब्याज काटने की प्रक्रिया पूरी की है। एलडीएम अमित बुंदेला का कहना है कि यह सब किसी लोकल अधिकारी और कर्मचारी के हाथ में नहीं है। बैंक की जो गाइडलाइन ऊपर से है, उसी के अनुरूप काम हो रहा है। बैंक का ब्याज और बकाया तो चुकाना ही पड़ेगा। सरकार ने जो समय दिया था वह पूरा हो गया है।
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उद्योगों की टूट जाएगी कमर
आईआईए के चेयरमैन पंकज अग्रवाल का कहना है इंडस्ट्री पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रही है। बैंकों का यह कदम उद्योग के लिए घातक सिद्ध होगा। व्यापार में पैसे का प्रवाह रुक जाएगा। उद्योगों पर बुरा असर पड़ेगा। उद्यमी कुशपुरी का कहना है कि छह महीने की रुकी किस्त का ब्याज एक साथ ले लिए जाने से पूरी अर्थव्यवस्था धड़ाम हो जाएगी। व्यवसाय में पैसे का प्रवाह रुक जाएगा। सरकार को रुकी किस्त और ब्याज को आगामी 12 महीनों में विभाजित करना चाहिए था।
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