कोरोना कर्फ्यू के साये में बैंड बाजा-बरात की धूम
मुजफ्फरनगर/खतौली। लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के चलते लागू किए गए कोरोना कर्फ्यू के चलते सहालग का दूसरा साया भी कोविड गाइडलाइन के प्रतिबंधों के साये में संपन्न हुआ। सीमित मेहमानों की मौजूदगी में शादी-विवाह के आयोजन करते हुए घुड़चढ़ी की रस्में अदा की गईं, जिनमें गाइडलाइन का भी पूरी तरह से पालन किया गया।
हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार 24 अप्रैल से शुरू हुए सहालग के साये का दूसरा दिन भी कोरोना कर्फ्यू की भेंट चढ़ गया। रविवार को जनपद में बड़ी संख्या में शादी-विवाह के आयोजन थे, लेकिन कोरोना कर्फ्यू के चलते कोविड गाइडलाइन के तहत बेहद सीमित मेहमानों की मौजूदगी में सभी आयोजन संपन्न हुए। शहर की सूनी सड़कों पर डीजे व बैंड-बाजों के साथ घुड़चढ़त की रस्में संपन्न हुईं, जिनमें गाइडलाइन का भी बखूबी पालन किया गया। हालांकि जिन घरों में शादी-समारोह थे, उनके अनुसार प्रशासन द्वारा जारी की गई गाइडलाइन के अनुसार बंद हॉल में 50 और खुले मैदान में सौ मेहमानों की दी गई अनुमति अपर्याप्त रही। यहां तक कि जिन घरों में लाडलों की शादियां थीं, वे केवल चुनिंदा मेहमानों के साथ ही दुल्हन लेने के लिए वधू पक्ष के यहां पहुंचे।
केस एक- शहर के मोहल्ला कृष्णापुरी निवासी राकेश गर्ग के बेटे विभोर गर्ग की बरात गाजियाबाद के कस्बा साहिबाबाद में गई। परिजनों ने सभी रिश्तेदार, परिचित व दोस्तों को शादी का न्योता दिया, लेकिन ऐनवक्त पर कोरोना कर्फ्यू लागू होने के चलते परिजन चुनिंदा मेहमानों के साथ दुल्हन लेने के लिए रवाना हुए।
केस दो- गांव नरा निवासी जोगेंद्र के बेटे की बरात खतौली पहुुंची, जिसकी घुड़चढ़ी कस्बे के पैंठ रोड स्थित भवानी मंदिर से शुरू हुई। इस अति महत्वपूर्ण रस्म में कोरोना कर्फ्यू के चलते वर पक्ष के बमुश्किल 20 मेहमान ही शामिल हुए। जोगेंद्र का कहना था कि कोरोना कर्फ्यू के चलते वे केवल 25 लोगों की बरात लेकर ही पहुंचे हैं।
खाली प्लाटों में टेंट लगाकर हुआ शादी समारोह
खतौली। सहालग के दूसरे साये में भी कस्बे के सभी बैंक्वेट हॉल पूरी तरह सुनसान नजर आए। लोगों ने सीमित मेहमानों के साथ हुए शादी-विवाह के आयोजनों को बैंक्वेट हॉल से हटाकर गली-मोहल्लों में खाली प्लॉट या छोटी धर्मशालाओं में शिफ्ट कर दिया।