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सहालग के साये में बैंड-बाजा-बरात की धूम

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मुजफ्फरनगर। सहालग के शुभ मुहूर्त में जनपद में सोमवार को बैंड-बाजा-बरात की धूम रही। शहर के सभी बैंक्वेट हॉल के साथ ही सामुदायिक भवनों में भी शादी-समारोह आयोजित हुए। कोविड के प्रतिबंधों से बचने के लिए लोगों ने गली-मोहल्ले को छोड़कर बैंक्वेट हॉल के साथ ही गांव-देहात का रुख किया।
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सोमवार को सहालग के शुभ मुहूर्त के चलते जनपद में शादी-विवाह के आयोजन हुए। शहर में तो लगभग हर मार्ग पर घुड़चढ़त होती देखी गई। वहीं, शहर के सभी बैंक्वेट हॉल पूरी तरह से फुल रहे, जहां कोविड गाइडलाइन के नियमों का पालन करते हुए शादी-विवाह की रस्में संपन्न की गईं। कोविड गाइडलाइन के चलते ही इस बार लोगों ने अपने घर में या फिर गली-मोहल्लों को छोड़कर खुले स्थान पर शादी समारोह आयोजित किए। वहीं, कोरोना गाइडलाइन के तहत बंद हॉल में 50 लोग व खुले स्थान पर शादी में सौ लोगों के शामिल होने के नियम का पालन करने की खातिर लोगों ने इस बार बैंड-बाजे से दूरी बनाते हुए बड़ी संख्या में डीजे बुक किए।
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केस एक- शहर के मोहल्ला रामलीला टिल्ला निवासी चमनलाल के बेटे शशि कुमार की शादी सोमवार को हुई। बरात जाने से पूर्व नाते-रिश्तेदार व आसपास के लोगों के लिए दावत का आयोजन इस बार रामलीला टिल्ला के खुले मैदान में किया गया। चमनलाल का कहना है कि कोरोना महामारी के चलते हमारी भी जिम्मेदारी बनती है, जिसके चलते आयोजन को खुले स्थान पर ले जाया गया।
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केस दो- शहर से सटे गांव सुजड़ू के मोहल्ला कूंगरपट्टी निवासी सेवाराम की बेटी की शादी रविवार को संपन्न हुई। पहले आयोजन को गांव में ही घर पर किया जाना था, लेकिन कोरोना संक्रमण के लगातार प्रसार के चलते ऐनवक्त पर आयोजन को गांव के सामुदायिक भवन के खुले स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया।
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शहर के शाहबुद्दीनपुर रोड निवासी केटर्स जयवीर सिंह का कहना है कि इस बार बड़ी संख्या में शादी-विवाह के आयोजन खुले स्थानों पर किए गए। वहीं, कई ऐसे आयोजन भी रहे, जिनके यहां गाइडलाइन से अलग मेहमानों की अधिक संख्या रहनी थी, उन्होंने प्रतिबंधों से बचने के लिए शहर से सटे गांवों में शादी-विवाह के आयोजन किए।
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