मुजफ्फरनगर। कोरोना महामारी के चतले कांवड़ यात्रा इस वर्ष नहीं होने की खबर से हजारों लोगों को रोजगार का झटका लगा है। पूरे साल से उम्मीद बांधे रखने वाले हलवाईयों, ढाबा संचालकों, चाय की दुकान वालों, टैंट, लाईट, क्राकरी, डीजे वालों का तो दस दिन का व्यापार ही छिन गया है। कांवड़ बनाने वालों से लेकर अंगोछा बेचने वालों तक के सामने संकट पैदा हो गया है।
कांवड़ यात्रा का सबसे ज्यादा रस मुजफ्फरनगर जनपद में ही रहता है। यहां के तीन मार्गों पर कांवड़ यात्रा के दौरान केवल बोल-बम की आवाजें ही गूंजती रहती हैं। कांवड़ यात्रा से न केवल लोगों की श्रद्धा जुड़ी है, वहीं हजारों लोगों का रोजगार भी इससे जुड़ा हुआ है। नहर पटरी मार्ग, दिल्ली-देहरादून राजमार्ग, पानीपत-खटीमा राजमार्ग पर हजारों लोग शिविर लगाते हैं। इनमें भोजन बनाने वाले हलवाई, टेंट लगाने वाले, डीजे बजाने वाले, क्राकरी देने वाले, लाइट वाले सभी का रोजगार जुड़ा था। एक हलवाई के साथ पांच से दस लोग तक काम करते हैं। यही स्थिति इन मार्गों पर छोटे-छोटे ढाबे और चाय की दुकान लगाने वालों की है। ये लोग बड़ी बेसब्री से कांवड़ यात्रा का इंतजार करते हैं और अपनी चार-पांच महीने की रोजी-रोटी का जुगाड़ कर लेते हैं। कांवड़ बनाने वालों और अंगोछा बेचने वालों का व्यापार भी प्रभावित हो गया है।
हलवाई के कार्य से जुड़े दिनेश कुमार कहते हैं कि जिले में ही इस व्यसाय से जुड़े दस हजार लोगों को किसी न किसी रूप में कांवड़ शिविरों में काम मिल जाता था। इस बार शादियों का सीजन पिट जाने के बाद कांवड़ यात्रा पर कुछ उम्मीद टिकी थी वह भी खत्म हो गई। कोरोना ने रोजगार पर पानी फेर दिया है।
टेंट व्यवसाय से जुड़े मनीष टैंट हाउस के मालिक अश्वनी रहेजा कहते हैं कि कांवड़ यात्रा के दौरान सभी टेंट वालों को कुछ न कुछ काम मिल जाता था। जहां शिविर लगाते हैं, वहां टेंट जरूर लगता है। कुर्सी, जेनरेटर आदि की जरूरत पड़ती ही है। इस बार कांवड़ यात्रा नहीं होने से सैकड़ों टेंट संचालक प्रभावित होंगे, क्योंकि कोरोना के कारण पहले से की काम बंद पड़े हैं।
टाउनहाल के पास गारमेंट्स का काम करने वाले दुकानदार अशोक कुमार का कहना है कि हर बार कांवड़ में अच्छा सीजन जाता था। इस बार कांवड़ यात्रा नहीं होने से काम प्रभावित होगा। अंगोछे और बनियान के आर्डर पहले ही दे दिए थे, यह माल रखा रह जाएगा।
रोजगार प्रभावित होगा: मनोज
मुजफ्फरनगर। क्रांति शिवसेना के मनोज सैनी ने बताया कि लंबे समय से उनका आनंद भवन में शिविर लगता रहा है। शिविर में संगठन के कार्यकर्ता तो नि:शुल्क सेवा देते हैं, लेकिन हलवाई, टेंट, लाइट आदि से जुड़े लोगों को सीधे रोजगार मिलता है। मुजफ्फरनगर जनपद में ही कम से कम बीस हजार लोगों का रोजगार प्रभावित होगा।
दस करोड़ से अधिक का व्यापार होगा प्रभावित
मुजफ्फरनगर। शिविर संचालक मनोज सैनी कहते हैं कि कांवड़ यात्रा के दौरान किरयाना का राशन बड़ी मात्रा में शिविरों में लगता है। दूध और सब्जी की बड़ी डिमांड रहती है। टेंट, लाइट, हलवाई, क्रॉकरी आदि का खर्च जोड़ा जाए तो दस करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होता है। कांवड़ यात्रा के नहीं होने से यह सीधे प्रभावित होगा।
ट्रांसपोर्ट और बाजार को लाभ
मुजफ्फरनगर। कांवड़ यात्रा के दौरान जिले की व्यवसायिक गतिविधियां पूरी तरह बाधित हो जाती थी। बाजारों में ग्राहक नहीं आ पाते थे, ट्रांसपोर्ट का कार्य पूरी तरह रुक जाता था। इससे इन व्यापारियों को बड़ा नुकसान होता था। इस बार करोड़ों का व्यापार प्रभावित नहीं हो पाएगा।
पुलिस प्रशासन लेगा राहत की सांस
मुजफ्फरनगर। कांवड़ यात्रा को लेकर इस बार सबसे ज्यादा सकून प्रशासन महसूस करेगा। कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था आदि को लेकर प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इस बार प्रशासन को अतिरिक्त मेहनत नहीं करनी होगी।