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आर्य समाज मंदिर का ताला बंद, सड़क पर हुआ यज्ञ

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आर्य समाज नई मंडी के बाहर हवन करते हुए अनुयायी - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। शहर के 94 साल पुराने आर्य समाज मंदिर को लेकर विवाद सड़क पर आ गया है। रविवार को अनुयायी साप्ताहिक यज्ञ करने पहुंचे तो आर्य समाज मंदिर के गेट पर ताला लगा मिला। चाबी नहीं मिली तो सड़क पर ही यज्ञ किया। उधर, संरक्षक का कहना है कि मंदिर में अंदर यज्ञ चल रहा था। कुछ लोग बेवजह मामले को तूल दे रहे हैं।
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नई मंडी के आर्य समाज मंदिर में देश के प्रतिष्ठित सन्यासियों, भजनोपदेशक ने अपने उपदेशों, भजनों से लाखों लोगों को प्रेरित किया है। रविवार को अतर सिंह, डॉ. जीत सिंह तोमर और दीपक त्यागी ने बताया कि अनुयायी साप्ताहिक यज्ञ करने के लिए आर्य समाज मंदिर पहुंचे थे, वहां मुख्य द्वार पर ताला लगा मिला। चाबी तलाशी गई, लेकिन नहीं मिली।
इस वजह से प्रबुद्ध नागरिकों ने महर्षि दयानंद मार्ग (वकील रोड) पर ही यज्ञ प्रारंभ कर दिया। सड़क पर यज्ञ सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहा। डॉ. जीत सिंह तोमर ने बताया कि उत्तर प्रदेश इकाई के अलावा सार्वदेशिक सभा के पदाधिकारियों को जानकारी दी गई है। मौके पर अनूप सिंह राठी, वीरेंद्र बालियान, मंगत सिंह, सतप्रकाश बंसल, भूप सिंह, नवीन सैनी, मृगेंद्र ब्रह्मचारी मौजूद रहे।
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संपत्ति पर नहीं करने दिया जाएगा कब्जा
नई मंडी आर्य समाज के संरक्षक राजपाल सिंह चाहल का कहना है कि कुछ लोग आर्य समाज की संपत्ति पर कब्जा करना चाहते हैं। इसलिए उन्हें अंदर नहीं घुसने दिया गया। वर्तमान कमेटी ने अंदर साप्ताहिक यज्ञ किया है। किसी को भी आर्य समाज की संपत्ति को कब्जाने नहीं दिया जाएगा।
चाबी नहीं दी गई, इसलिए सड़क पर यज्ञ
आर्यसमाज गांधी कॉलोनी के गजेंद्र राणा और डॉ. जीत सिंह तोमर का कहना है कि मंदिर नहीं खुला होने के कारण सड़क पर यज्ञ हुआ। चाबी मांगी गई थी, लेकिन नहीं मिली।
94 साल बाद हिलने लगी आर्य समाज की नींव
शहर सर्व समाज के दानवीरों ने ब्रिटिश हुकूमत के दौरान 1928 में नई मंडी क्षेत्र में यह भव्य आर्य समाज भवन बनाया था। जहां आज नई मंडी क्षेत्र का मुख्य बाजार है। कीमती दुकानें आर्य समाज मंदिर की भूमि में स्थित है। प्रति माह बड़ा किराया संस्था को किराए के रुप में मिलता है। बीते दस साल में संस्था में फूट बढ़ती गई, कुछ लोग खुद बिगड़ते माहौल में किनारे हो गए और कुछ दरकिनार कर दिए गए।
समाज सुधार आंदोलन पर कुठाराघात
बुजुर्ग आर्य समाज के विद्वान आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि संस्था में गुटबाजी, विवाद महर्षि दयानंद के समाज सुधार आंदोलन पर कुठाराघात है। उक्त घटना निंदनीय है। सभी मिल-जुल कर संस्था चलाएं, मतभेदों को आपसी संवाद से खत्म करें। त्याग, सेवा, देशभक्ति आर्य समाज की पहचान है।
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