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भगीरथ पानी लेकर नहीं आया तो मर जाएगी ‘नागिन’

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खतौली के गांव अंतवाड़ा काली नदी का उद्गम स्थल - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। 500 साल तक लोगों की प्यास बुझाने वाले काली पूर्वी उर्फ नागिन नदी अब खुद पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रही है। अंतवाड़ा में उद्गम स्थल सूख गया है। जगह-जगह झाड़ियां खड़ी हैं। इतिहास समेत नदी को जिंदा रखने के लिए बातें बहुत हुईं, लेकिन अभी तक कोई भगीरथ पानी लेकर नहीं आया।
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अंतवाड़ा के राजबीर सिंह एडवोकेट बताते हैं कि काली पूर्वी उर्फ नागिन नदी का इतिहास सुनते-सुनते बड़े हुए हैं। बचपन में नदी को कल-कल बहते देखा, लेकिन पिछले डेढ़ दशक में जलस्तर इतना गिरा कि नदी सूख गई। अधिकारी आते हैं, बातें होती हैं, लेकिन अभी तक पानी का इंतजाम नहीं हुआ।
प्रधान दिग्विजय सिंह उर्फ चिंटू कहते हैं कि हमारे लिए यह गौरव की बात है कि गांव से नदी निकलती थी। उद्गम स्थल सूख जाने के कारण नागिन में अब पानी नहीं है। नदी और अपने इतिहास को जिंदा रखने के लिए अधिकारियों को पानी का स्रोत लाने का सुझाव दिया गया है। नदी जिंदा रहनी चाहिए।
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गांव के रमेश प्रधान कहते हैं कि अंतवाड़ा के लिए नागिन सिर्फ नदी नहीं है, बल्कि इतिहास है। नदी को सब जिंदा देखना चाहते हैं, पहले जैसी बहते हुए। सरकार के बिना अब यह संभव नहीं है। कभी झील बनाने की बात होती है तो कभी पानी लाने की, लेकिन अभी तक धरातल पर कुछ नहीं हुआ। ग्रामीण बाबूराम कहते हैं कि नागिन नदी जिंदा रहनी चाहिए। ग्रामीणों ने नदी की जमीन छोड़ दी है, अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि इसमें पानी लाने का काम करें।
अंतवाड़ा से कन्नौज तक बहती है नागिन
काली पूर्वी उर्फ नागिन का उद्गम स्थल खतौली के पास अंतवाड़ा गांव से है। यहां नदी सूख गई है। जिले में पालड़ी, रसूलपुर कैलोरा, जावन, जसोला, सिकंदरपुर और कढ़ली होते हुए नागिन मेरठ की सीमा में प्रवेश कर जाती है। जिले के करीब 20 किमी के एरिया में नदी सूखी हुई है।
कोरोना संक्रमण के बाद छूट गए प्रयास
दो साल पहले नदी को पुनर्जीवित करने के लिए प्रयास किए गए थे। प्रशासन ने नदी क्षेत्र की जमीन को कब्जा मुक्त कराया। तालाब से नदी में पानी चलाने की बात हुई। झील बनाने पर विचार हुआ। इसके अलावा गंगनहर से रजबहे के रास्ते पानी लाने का प्रस्ताव भी रखा गया। लेकिन कोरोना संक्रमण के बाद प्रयास पीछे छूट गए और नदी पानी के लिए तरस गई।
जिले में इस तरह बहती हैं नदियां
- हिंडन नदी : जिले में हिंडन की लंबाई करीब 76 किमी है। खेतों की सिंचाई में भी यह नदी बहुत उपयोगी है।
- काली नदी : जिले में काली नदी की लंबाई करीब 64 किमी है। बुढ़ाना क्षेत्र में अटाली मेरठ की सीमा पर नदी हिंडन में जाकर मिल जाती है।
- नागिन उर्फ काली पूर्वी : खतौली के अंतवाड़ा से करीब 20 किमी की सीमा है। मेरठ क्षेत्र से नदी कन्नौज तक बहती है।
आस्था का केंद्र सोलानी को चाहिए पानी
शुकतीर्थ आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र सोलानी नदी को पानी की जरूरत है। लक्सर से बहकर आने वाली नदी शकुतीर्थ होते हुए गंगा नदी में समाहित हो जाती है। करीब 15 किमी का नदी में पानी का बहाव रखने के लिए संत और श्रद्धालु बार-बार मांग करते रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
नदी के लिए जारी रहेंगे प्रयास
सीडीओ आलोक कुमार का कहना है कि काली पूर्वी नदी के जीर्णोद्धार के लिए काफी प्रयास हुए हैं। जमीन कब्जामुक्त कराई गई थी। सुंदरीकरण कराया। पानी लाने के प्रयास होंगे।
नदियों में लाया जाएगा पानी
केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान का कहना है कि काली पूर्वी और सोलानी नदी में पर्याप्त पानी के लिए प्रयास किए जाएंगे। दोनों जगह पहले भी काम कराए हैं। पर्याप्त पानी की व्यवस्था होगी।
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सोलानी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र
स्वामी ओमानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि सोलानी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। उत्तराखंड से नदी में पर्याप्त पानी का इंतजाम होना चाहिए।
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