मदरसा प्रबंधकों के साथ ही ग्रामीणों ने भी साधी चुप्पी
खतौली (मुजफ्फरनगर)। मौलाना कलीम सिद्दीकी की धर्मांतरण प्रकरण में गिरफ्तारी की जानकारी मिलने के बाद से फुलत के ग्रामीण सकते हैं।मदरसा प्रबंधन ने भी खामोशी अख्तियार कर ली है। एलआईयू ने मामले की पड़ताल के लिए फुलत में डेरा डाल दिया है।
गांव फुलत निवासी मौलाना कलीम सिद्दीकी का इस्लामिक विद्वानों में बड़ा नाम है। उनकी गिनती बड़े इस्लाम विद्वान में होती है। वर्ष 1993 में मदरसा जामिया इमाम वलीउल्लाह इस्लामिया की स्थापना किए जाने और बाद में इसके विस्तार व कई बड़ी शख्सियतों के इसमें होने वाले आयोजनों में शरीक होने से गांव में मौलाना सिद्दीकी का प्रभाव बढ़ता गया। ग्रामीण बताते हैं कि वर्ष 2006 में मौलाना सिद्दीकी के परिवार सहित दिल्ली के शाहीन बाग जाकर रहना शुरू किया, इसके बाद से अचानक मदरसे का विस्तार शुरू हुआ और देखते ही देखते यहां से कई बड़े नाम जुड़ते चले गए। इसके साथ ही मदरसे में देश-विदेश से भी लोग आने शुरू हुए, लेकिन मौलाना कलीम सिद्दीकी के प्रभाव के चलते स्थानीय ग्रामीण मदरसे में होने वाले कार्यक्रमों की अनदेखी करते रहे। मदरसे के मोहतमिम समेत अन्य शिक्षकों ने भी इस पूरे प्रकरण में पूरी तरह खामोशी अख्तियार कर ली है। स्थानीय अफसरों ने इस पूरे प्रकरण पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है।
लोदी कालीन है फुलत का प्राचीन मदरसा
खतौली। रतनपुरी क्षेत्र के गांव फुलत में स्थापित प्राचीन मदरसा फैजुल इस्लाम लोदीकाल का बताया जाता है। सिकंदर लोदी के समयकाल में उनके धर्मगुरु माने जाने वाले मुल्ला यूसुफ नासिही फुलत आए, जिन्होंने एक पेड़ के नीचे बच्चों को पढ़ाना शुरू किया था। बाद में इसे मदरसा फैजुल इस्लाम की शक्ल दी गई, जिससे वर्ष 1987 में फुलत निवासी मौलाना कलीम सिद्दीकी देखभाल करने के नाते जुड़े। छह साल बाद उन्होंने प्राचीन ऐतिहासिक मदरसे के पास ही अपना खुद का नया मदरसा जामिया इमाम वलीउल्लाह इस्लामिया की शुरूआत की थी।
मुजफ्फरनगर के गांव फुलत में मौलाना कलीम का जामिया इमाम वलीउल्ल्लाह इस्लामिया मदरसा।- फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर जिले के खतौली के गांव फुलत में मौलाना कलीम सिद्दीकी का पैतृक मकान।- फोटो : MUZAFFARNAGAR