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......अल्लाह बुला ले तू मुझको भी मदीने में

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देवबंद में बारा वफात पर नातिया महफिल-ए-मुशायरा में कलाम प्रस्तुत करते शायर - फोटो : DEVBAND
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...अल्लाह बुला ले तू मुझको भी मदीने में
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देवबंद (सहारनपुर)। असगरिया मदरसे में शुक्रवार को बारा वफात के उपलक्ष्य में नातिया महफिल-ए-मुशायरा आयोजित किया गया, जिसमें शायरों ने कलाम प्रस्तुत कर लोगों की खूब वाहवाही बटोरी।
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मुशायरे का शुभारंभ इब्राहिम मियां की तिलावते कलाम पाक से हुआ। शमीम किरतपुरी ने कहा-मेरे आका के पसीने में है जैसी खुशबू, ऐसी खुशबू तो किसी फूल में आने से रही। दिलशाद खुश्तर ने पढ़ा-अपने होठों पे सजाओ तो सुबह शाम दरूद, तुमको सरकारे दो आलम की जियारत होगी। जावेद आसी ने कहा-आफताब उभरता है गलियों से मदीने की, चांद सजदे करता है रात भर मदीने में। नफीस अहमद ने पढ़ा-इक दर्द सा उठता है अक्सर मेरे सीने में, अल्लाह बुला ले तू मुझको भी मदीने में। फैसल उस्मानी का कलाम यूं रहा-तारीख अगर ढूंढें सानी-ए-मोहम्मद, सानी तो बड़ी चीज है साया न मिलेगा। इनके अलावा तनवीर अजमल, हसरत देवबंदी, अदनान अनवर, सुहेल अकमल, नूर हसन, डा. नवेद ने भी कलाम पढ़े। कार्यक्रम में सैयद ताहिर हुसैन, सैयद नबील हुसैन, वसीउल्लाह, नैयर जमाल, यूसुफ साबरी आदि रहे।
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