मुजफ्फरनगर। चीन का नेशनल गेम वुशू (कुंग्फू) भारतीय खिलाड़िय़ों पर छा रहा है। बिलासपुर में माली हालत का वुशू खिलाड़ी कला का सिकंदर बन गया है। अपने कौशल के बूते दो बार राज्य स्तरीय प्रतियोगिता खेलने के साथ नेशनल स्तर पर कुंग्फू का डंका बजा चुका है। खिलाड़ी प्रियांश वुशू में भारत का प्रतिनिधित्व करने के गुर सीख रहा है।
गांव बिलासपुर निवासी प्रियांश के पिता धर्मेंश भंवर नगर पालिका में छोटे से कर्मचारी है। महीनभरे की तनख्वाह से घर-परिवार की जरूरतों की पूरी ही हो पाती है, जबकि बेटे में खेल के प्रति रुझान होने से मुश्किल खड़ी हो गई। मुश्किल यह नहीं वे खिलाड़ी बनना चाहता है, बल्कि ये है कि मॉली हालत में बेटे में खेल के संसाधन देने में पिता असमर्थ है।
हालांकि दुलार के साथ दुआएं अधिक है। मां-पिता की दुआ और कड़ी मेहनत के पर प्रियांश ने कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ऩा शुरु कर दिया। प्रियांश रोजाना चौधरी चरण सिंह स्पोर्ट्र्स स्टेडियम में वुशू की प्रैक्टिस करता है। उसके बेहतर प्रदर्शन पर स्टेडियम की टीम से वह स्टेट प्लेयर बन गया। स्टेट स्तर खेलकर प्रियांश ने गोल्ड के साथ रजत पदक जीते हैं। इसके अलावा भी प्रियांश ने स्टेट की टीम में खेलकर गोल्ड पर कामयाबी का कुंग्फू खेला है। अपने कौशल से प्रियांश कला का सिकंदर बन गया है।
किराया नहीं, साइकिल का सफर
मुजफ्फरनगर। स्टेडियम मुख्यालय प्रियांश के गांव से 10 किलोमीटर पड़ता है। ऐेसे में बस, वाहन का किराया उसकी जेब में नहीं से कई बार कोचिंग छूट गई। इससे निराश प्रियांश ने मेहनत कर साइकिल ली और उसे सफर का साथी बना लिया। प्रियांश राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने के लिए सुबह और शाम कोचिंग लेता है। जिसके लिए वह रोजाना साइकिल से यात्रा करता है।
ऐसे जीते हैं पदक
मुजफ्फरनगर। वुशू कोच मनीष शर्मा बताते हैं कि तीन वर्ष पहले प्रियांश ने स्टेडियम में वुशू ज्वाइन किया। मेहनत और लगनता के बल पर कामयाबी पाई। प्रियांश ने आगरा में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में रजत और कांस्य, डेढ़ साल पहले खुर्जा में स्टेट चैम्पियनशिप में रजत और कांस्य पदक जीते हैं। इसके अलावा भी वर्ष 2015 में हिमाचल प्रदेश में हुई नेशनल स्तरीय प्रतियोगिता में पांचवा स्थान प्राप्त किया था। हाल ही में अंबेडकर गेम्म प्रतियोगिता में नेशनल स्तर पर ही गोल्ड मेडल जीता है।