करोड़ों के राजस्व से जुड़े पालिका के विज्ञापनों के ठेकों को लेकर ईओ और कर एवं राजस्व अधीक्षक ने शासन के नियमों को ताख पर रख दिया। ई-टेडरिंग से नगरीय क्षेत्र में विज्ञापन के टेंडर की प्रक्रिया होनी थी, मगर एजेंसियों से गोलमाल कर अफसरों ने खेल कर दिया। खुलासे के बाद चेयरमैन ने प्रमुख सचिव नगर विकास को ईओ की हठधर्मिता और नियम विरुद्ध कार्यशैली के लिए पत्रावली भेजी है। पालिका अध्यक्षा ने कर अधीक्षक से भी चार्ज छीन लिया है।
नगर पालिका में विज्ञापन के ठेकों को लेकर बीते दो दशक से कमाई का बड़ा खेल चल रहा है। अफसरों ने राजस्व के सहारे पालिका की आमदनी बढ़ाने के बजाय मिलीभगत कर न सिर्फ अपनी जेबें भरी, बल्कि एजेंसियों को भी मालामाल होने का मौका दिया। योगी सरकार ने प्रदेश की पालिकाओं को राजस्व बढ़ाने के लिए विज्ञापनों की ई-टेंडरिंग के आदेश दिए हैं। ई-टेंडरिंग का फरमान आते ही अफसरों और एजेंसी मालिकों के होश उड़ गए। सरकारी राजस्व को कैसे नुकसान पहुंचाने का खेल होता है, यह शहर की नगर पालिका में सामने आया।
विज्ञापन शुल्क की ई-निविदा कार्य के विरुद्ध अधिशासी अधिकारी विकास सैन और कर एवं राजस्व अधीक्षक आरडी पोरवाल ने नियमों, तथ्यों, अभिलेखों और समस्त वस्तु स्थिति को दरकिनार कर दिया। गुपचुप तरीके से बिना ई-टेंडरिंग के पंजीकृत 37 विज्ञापन एजेंसियों में से केवल नौ एजेंसियों के हक में 14 मई को टेंडर दे दिए गए। दस दिन बाद 24 मई को ठेका पाने वाली एजेंसियों ने पालिका के खाते में 13.39 लाख रुपये अग्रिम राजस्व शुल्क जमा कर दिया।
आरटीजीएस के जरिये यह रकम पालिका के एकाउंट में ट्रांसफर की गई। योजनाबद्ध तरीके से हुए खेल का खुलासा तब हुआ, जब पालिका चेयरमैन अंजू अग्रवाल ने खाते में आई रकम की जानकारी ली। ई-टेंडरिंग नहीं किए जाने पर ईओ और कर अधीक्षक मनगढ़ंत तरीके से पालिका अध्यक्षा को बरगलाने में कामयाब नहीं हो पाए। चेयरमैन ने तत्काल नौ एजेंसियों को छोड़े गए विज्ञापन के टेंडर निरस्त कर दिए।
ईओ और कर अधीक्षक की मन मर्जी से गुस्साई चेयरमैन अंजू अग्रवाल ने दोनो अधिकारियों के खिलाफ पालिका राजस्व को हानि पहुंचाने की शिकायत प्रमुख सचिव नगर विकास से लिखित में की है। कर अधीक्षक आरडी पोरवाल से चार्ज छीन लिया गया और उन्हें मुख्य कार्यालय से अटैच कर दिया गया है। पालिका अध्यक्षा ने सात जून को ईओ विकास सैन को नियम विरुद्ध कार्य करने के खिलाफ चेतावनी पत्र जारी किया है। शासन और डीएम को भी ईओ और कर अधीक्षक की कार्यशैली से अवगत कराया गया है।
स्वीकृत होर्डिग्स से ज्यादा को दे दिया ठेका
मुजफ्फरनगर। विज्ञापन एजेंसियों से कमीशन के लालच में ईओ और कर अधीक्षक ने ठेके छोड़ने में भी चूक कर दी। शहरी क्षेत्र में 269 होर्डिग्स स्वीकृत हैं। पालिका अधिकारियों ने अपने हितों के लिए 304 होर्डिग्स के ठेके पसंदीदा एजेंसियों को दे दिए। पालिका के राजस्व को क्षति पहुंचाने का यह पहला मामला नहीं है।
एसटीपी के अंतर्गत मछली पालन से जुडे दो ठेकों को सीधा नीलाम करने का दबाव ईओ ने चेयरमैन पर बनाया। विवाद के बाद ई-निविदा से तालाबों के टेंडर किए गए तो पालिका को 22 लाख रुपये का अतिरिक्त मुनाफा हुआ। यह टेंडर 22 लाख के बजाय 44 लाख रुपये में छुटा। खंबे पर क्योक्स लगाने के ठेके में भी पालिका को 312 प्रतिशत तक की वृद्धि राजस्व में मिली।
नौ एजेंसियों का पैसा किया वापिस
मुजफ्फरनगर। गुपचुप तरीके से ईओ और कर अधीक्षक ने जिन नौ एजेंसियों को विज्ञापन के टेंडर दिए थे, उनका पैसा वापिस करने के आदेश चेयरमैन ने कर दिए है। टेंडरों की यथा स्थिति के लिए उच्च न्यायालय इलाहाबाद गई विज्ञापन एजेंसियों को निराशा हाथ लगी। हाईकोर्ट ने 31 मई को उनकी याचिका निरस्त कर दी।
ई-निविदा से ही छोडे़ंगे टेंडर: अंजू अग्रवाल
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका अध्यक्षा अंजू अग्रवाल ने बताया कि पालिका का राजस्व बढ़ाने के लिए विज्ञापन के टेंडर ई-निविदा से ही छोड़े जा रहे हैं। शासन के नियमों और तथ्यों के अनुसार ही प्रक्रिया पूरी की जायेगी। ईओ और कर अधीक्षक ने उन्हें अंधेरे में रखा और गुपचुप तरीके से नौ एजेंसियों का पैसा पालिका खाते में जमा करा लिया। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। ई-टेंडरिंग से पालिका में विज्ञापन ठेके को 37 लाख की बोली लग चुकी है। राजस्व की वृद्धि को ई-टेंडरिंग का समय बढ़ाया जा रहा है।