परिषदीय स्कूलों में लंबे इंतजार के बाद जनपद में शिक्षकों के समायोजन का शासनादेश जारी हो गया है। अंतरजनपदीय तबादलों के बाद प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्यापकों की व्यवस्था बनाने को मौजूदा शैक्षिक सत्र में पांच अगस्त तक समायोजन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। शीघ्र ही समायोजन को शिक्षकों से आवेदन लेने का कार्य प्रारंभ होगा।
बेसिक शिक्षा विभाग की सचिव मनीषा त्रिघाटिया के शासनादेश में वर्ष 2018-19 के शैक्षिक सत्र में अब अध्यापकों का समायोजन भी किया जाएगा। शासन के नियमों के मुताबिक 30 सितंबर, 2017 की छात्र संख्या के आधार पर विद्यालयों में अध्यापकों की संख्या निर्धारित की जाएगी।
बेसिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद से प्राप्त विद्यार्थी संख्या के बाद पदों का निर्धारण होगा। जिन सरकारी स्कूलों में मानक से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं, उन्हें वहां से हटाकर मानक से कम शिक्षकों वाले विद्यालयों में पद स्थापित किया जाएगा। समायोजन में स्कूल में कार्यरत कनिष्ठतम अध्यापक को हटाकर उन्हें यथासंभव उसी विकास खंड के विद्यालय में भेजा जाएगा।
दिव्यांग, असाध्य एवं गंभीर बीमारी से ग्रसित महिला शिक्षकों को उनकी सुविधानुसार उसी विकास खंड में तैनाती की जाएगी। मुख्य बात यह है कि जहां से सरप्लस अध्यापक समायोजित होंगे, उस स्कूल में किसी शिक्षक का स्थानांतरण तथा तैनाती नहीं की जा सकेगी। समायोजन में ध्यान रखा जाएगा कि कोई विद्यालय एकल न हो। अध्यापक और छात्र अनुपात 1:40 से अधिक और 1: 20 से कम नहीं होना चाहिए। अनियमितता पर बीएसए के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
पारस्परिक तबादले भी ले सकेंगे शिक्षक
मुजफ्फरनगर। शासन ने शिक्षकों की सहूलियत के लिए पारस्परिक स्थानांतरण प्रक्रिया अपनाने का भी निर्देश दिया है। समायोजन में जिले के भीतर यदि शिक्षकों के बीच पारस्परिक तबादले की सहमति बनती है, तो समिति विचार कर निर्णय ले सकती है। प्रत्येक उच्च प्राथमिक विद्यालय में विज्ञान तथा गणित के अध्यापकों की उपलब्धता भी बरकरार रखी जाएगी।
डीएम की अध्यक्षता में बनेगी समिति
मुजफ्फरनगर। समायोजन के लिए डीएम की अध्यक्षता में जनपदीय समिति निर्धारित की गई है। बीएसए समिति के सचिव और डायट प्राचार्य द्वारा नामित सदस्य तथा जनपद मुख्यालय पर कार्यरत खंड शिक्षा अधिकारी को समिति में सदस्य बनाया गया है। बताते चले कि वर्ष 2012 में जिले में विकास खंड क्षेत्रों में शिक्षकों का समायोजन हुआ था।