रेलवे दोहरीकरण के लिए अधिग्रहण की गई भूमि का मुआवजा अफसरों की मनमानी से फंस गया है। किसान चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अधिकारी कार्रवाई को राजी नहीं हैं। अधिग्रहण में जिले में करीब 1600 से अधिक किसानों की भूमि गई है। इसमें से लगभग 300 किसानों को मुआवजा राशि दी गई है। हालांकि अधिकांश गांवों के किसान रेलवे के मुआवजा राशि से खुश नहीं है। किसान 1000 रुपये से अधिक प्रति वर्ग मीटर की मांग पर अड़े हैं, जबकि रेलवे 300 से 700 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से मुआवजा बांट रहा है।
केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद मेरठ से टपरी तक रेलवे ट्रैक का दोहरीकरण कार्य प्रारंभ किया गया, जिसके लिए वर्ष 2015 में ट्रैक की जद में आ रहे किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया। जनपद में भी मुजफ्फरनगर परिक्षेत्र में 26 गांवों के किसानों की भूमि दोहरीकरण के लिए अधिग्रहीत की गई थी। इन गांवों में करीब 1650 से ज्यादा किसानों की भूमि के रेलवे ने दाम लगाए। अलग-अलग गांवों में भिन्न-भिन्न रूप में रेलवे बोर्ड ने मुआवजा राशि तय कर वितरण शुरू करा दिया।
वर्ष 2016 तक करीब 300 से अधिक किसानों को मुआवजा दिया गया। इसके बाद किसानों ने मुआवजा राशि कम बताते हुए एक हजार रुपये अधिक प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से राशि दिए जाने की मांग रखी। जबकि रेलवे बोर्ड किसानों को 300 रुपये 700 रुपये प्रति वर्ग मीटर मुआवजा दे रहा है। पिछले डेढ़ साल से इसी रस्साकसी और अफसरों की मनमानी के चलते करीब 1300 से ज्यादा किसानों का मुआवजा फंसा हुआ है।
भाकियू के जिलाध्यक्ष राजू अहलावत ने बताया कि रेलवे बोर्ड और भूमि अध्याप्ति अधिकारी किसानों के साथ धोखाधड़ी कर रहे हैं। किसानों की भूमि जबरन छीनकर औने-पौने दाम दिए जा रहे हैं। भूमि का मुआवजा 1020 से अधिक चाहिए। तभी रेलवे को दोहरीकरण का कार्य करने दिया जाएगा।
इन गांवों की हुई थी भूमि अधिग्रहण
मुजफ्फरनगर। रेलवे बोर्ड ने खतौली और मुजफ्फरनगर क्षेत्र के गांवों की भूमि का अधिग्रहण किया। जिनमें खतौली के गांव टबीटा, मढ़करीमपुर, टिटौड़ा, तिगाई, भंगेला, भैंसी तथा मंसूरपुर, नरा, जडौदा, जट नंगला, सीमली, पीनना, लकड़संधा, शेरपुर, बधाई खुर्द, सलेमपुर, बामनहेड़ी आदि 26 गांवों की भूमि अधिग्रहीत की गई है।
दिसंबर तक खत्म होंगे मुआवजे के केस
मुजफ्फरनगर। एडीएम वित्त सुनील कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें एक माह पूर्व ही एसएलओ का चार्ज मिला है। सहारनपुर में मुआवजे का कार्य धीमा था। हालांकि अब उन्होंने व्यवस्था की है कि एक दिन में दो गांवों के लोगों की शिकायत और कागजों की जांच की जाएगी। रिकार्ड जांचने में वक्त लग रहा है। किसानों के सभी मुआवजे के केस दिसंबर के अंत निपटा दिए जाएंगे। मामले में तेजी से कार्रवाई की जा रही है।