मुजफ्फरनगर। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध की आड़ में सुनियोजित तरीके से हिंसा को अंजाम देने के मामले में नामजद किए गए रसूखदार पुलिस की पकड़ से दूर हैं। पांच दिन में केवल एक नामजद आरोपी ही पुलिस के हत्थे चढ़ा है, जबकि कुछ अग्रिम जमानत के लिए अदालतों के चक्कर काट रहे हैं। हालांकि, हालात का जायजा लेने के लिए ऐसे सफेदपोश सोशल मीडिया पर लगातार अपडेट हो रहे हैं।
सीएए को लेकर 20 दिसंबर की दोपहर हुए उपद्रव के मामले में पुलिस ने कई रसूखदारों को भी आरोपी बनाते हुए नामजद किया था। इनमें कई ऐसे शख्स भी शामिल हैं, जो 20 दिसंबर को सुबह से दोपहर तक पुलिस एवं अफसरों के साथ खड़े हुए थे, लेकिन दोपहर होते-होते उपद्रवियों से मिल गए। पुलिस ने ऐसे सफेदपोशों को सीसीटीवी फुटेज एवं वीडियोग्राफी के माध्यम से चिह्नित करते हुए इन्हें मुख्य मुकदमे में नामजद किया था। इनमें से कुछ तो दो-दो मामलों में नामजद हुए हैं। पुलिस की लगातार दबिश के बावजूद ये सफेदपोश गिरफ्त से दूर हैं। हालांकि, इनका सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार पुलिस गतिविधियों से रूबरू हो रहे हैं। सूत्रों की मानें तो उपद्रव के बाद से भूमिगत हो चुके ये रसूखदार गुपचुप तरीके से अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट के भी चक्कर काट रहे हैं।
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स्थानीय कोर्ट में है सात जनवरी तक अवकाश
मुजफ्फरनगर। उपद्रव में नामजद हुए इन सफेदपोशों को राहत पाने के लिए हाईकोर्ट इसलिए भी मुफीद लग रहा है, क्योंकि जनपद कोर्ट में अब सात जनवरी तक अवकाश है। इसके चलते पुलिस भी गिरफ्तारी से इतर किसी अन्य तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं कर पाने की स्थिति में है, जिसका फायदा रसूखदार उठाने की जुगत में लगे हैं।
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इन्होंने कहा ..........
इंस्पेक्टर अनिल कपरवान का कहना है कि बवाल के मुकदमों में वांछित कोई भी व्यक्ति कितना ही रसूखदार क्यों न हो, उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। कोई आरोपी लगातार सोशल मीडिया पर अपडेट है तो इसकी जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी।