संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर।पूर्व विधायक शाहनवाज राना के बेटे अब्दुल आहद राना की जेल से रिहाई कराने के लिए जमानत तस्दीक के मामले में पुलिस की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया है। जमानत तस्दीक की पुलिस की रिपोर्ट कोर्ट पहुंचने से पहले ही किसी ने कोर्ट में पुलिस की फर्जी रिपोर्ट पेश कर दी। इसके आधार पर आरोपी को जमानत मिल गई। अब फर्जीवाड़े की सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
सुजडु निवासी पूर्व विधायक शाहनवाज राना को सिविल लाइन पुलिस ने जीएसटी टीम पर हमले के मामले में गिरफ्तार किया था। जेल में चेकिंग के दौरान उनसे 25 मार्च 2025 को मोबाइल बरामद हुआ था। पूर्व विधायक को मोबाइल पहुंचाने के मामले में पुलिस ने पूर्व विधायक के बेटे अब्दुल आहद राना को आरोपी बनाया था। नई मंडी कोेतवाली पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था।
परिजनों ने उसकी रिहाई के लिए जमानत की कार्रवाई शुरू की थी। उसकी जमानत के लिए दो जमानतियों के दस्तावेज खालापार थाने भेजे गए थे। पुलिस इस मामले में अपनी रिपोर्ट कोर्ट भेजती इससे पहले ही किसी ने खालापार थाना प्रभारी महावीर चौहान व चौकी प्रभारी के फर्जी हस्ताक्षर व मोहर लगाकर रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट में पिछले साल 11 नवंबर को पेश कर दी थी। इस रिपोर्ट के आधार पर जमानत हो गई थी।
एसपी सिटी सत्य नारायण प्रजापत ने बताया कि 11 नवंबर को कोर्ट में दी गई रिपोर्ट के आधार पर जमानत हुई थी जबकि खालापार थाने की रिपोर्ट लगभग छह दिन बाद कोर्ट में भेजी गई थी। इससे मामला संदिग्ध बन गया था। उन्होंने जांच कराई तो फर्जीवाड़ा सामने आया।
चौकी प्रभारी का नाम भी रिपोर्ट में गलत लिखा गया है।
इस मामले में सिविल लाइन थाना प्रभारी आशुतोष सिंह की ओर से धोखाधड़ी का मामला दर्ज करा कर जांच शुरू की है। उन्होंने बताया कि जमानती तो असली थे लेकिन पुलिस की फर्जी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई।