मुजफ्फरनगर। नंगला मंदौड़ के मैदान पर 31 अगस्त 2013 की पंचायत में गम और गुस्से का इजहार किया गया। पश्चिम उत्तर प्रदेश के भाजपा नेताओं ने शिरकत की थी। पहली पंचायत से टिकैत बंधुओं ने दूरी बनाकर रखी थी। कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान पर यही अकेला मुकदमा था।
कवाल कांड के बाद जिला सुलगने लगा था। 28 अगस्त को मलिकपुरा में 31 अगस्त की पंचायत का एलान किया गया लेकिन इससे पहले ही 30 अगस्त 2013 को मीनाक्षी चौक के पास जुमे की नमाज के बाद मुस्लिम समाज के लोग बड़ी तादाद में इकट्ठा हुए।
बारिश के बावजूद 31 अगस्त को नंगला मंदौड़ में पंचायत हुई लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ। एलान किया गया कि सात अगस्त को दोबारा पंचायत होगी। दोबारा पंचायत हुई और फिर जिले में इसी दिन दंगा भड़क गया था। पंचायत से लौटते लोगों पर हमले किए गए। बाद में देश और प्रदेश की सियासत भी दंगे के ईद-गिर्द घूमती नजर आई।
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सपा सरकार में लिखे फर्जी मुकदमे : कपिल देव
राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि सपा सरकार में आमजन और भाजपा नेताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए थे। अदालत ने मुकदमा खत्म कर दिया है। भाजपा सरकार में सबको न्याय मिला है।
सबसे वापस लिए जाने चाहिए झूठे मुकदमे : बालियान
पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने कहा कि शासन से ही पहले ही आदेश हो चुके थे, अब अदालत ने मुकदमा वापसी के आदेश दिए हैं। दंगे में जिन लोगों पर फर्जी मुकदमे हैं, सबके वापस लिए जाने चाहिए। सपा सरकार में गलत मुकदमे दर्ज हुए थे।
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मेरे ऊपर सिर्फ परिवाद का मामला था : मलिक
सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि उनके ऊपर सिर्फ धारा 144 के उल्लंघन के परिवाद का मामला था। भड़काऊ भाषण का मामला भाजपा नेताओं के ऊपर था। अदालत के फैसले की वह सराहना करते हैं।