मुजफ्फरनगर। गाजियाबाद कोर्ट से लौटते वक्त बंदी को भगाने के मामले में दो सिपाहियों पर दोष सिद्ध हुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नरेंद्र कुमार ने दोनों को दो-दो वर्ष के कारावास और दो-दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
मामला दो सितंबर 1998 का है। जिला कारागार में बंद शामली जनपद के गढ़ीपुख्ता थाना क्षेत्र के राझड़ गांव निवासी प्रमोद को गाजियाबाद पुलिस लाइन में तैनात सिपाही बच्ची सिंह और राधेश्याम कोर्ट में पेश करने के लिए लेकर गए थे। गाजियाबाद से पेशी के बाद लौटते वक्त खतौली के निकट प्रमोद पुलिस कस्टडी से फरार हो गया था। विवेचना में दोनों पुलिसकर्मी की ही खामी उजागर हुई, जिसके बाद दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। एसपीओ डीसी श्रीवास्तव ने बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नरेंद्र कुमार ने सोमवार को दोनों सिपाहियों को धारा 223 में दोषी करार दिया। दोनों को दो-दो वर्ष और दो-दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। प्रमोद के फरार हो जाने के बाद दोनों सिपाही पहले पुलिस चौकी सकौती में रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे थे, जहां से बाद में यह मामला खतौली भेजा गया। लेकिन जांच में दोनों सिपाही फंस गए।