मुजफ्फरनगर। माध्यमिक स्कूलों के बच्चों को मिड-डे मील खिलाने की योजना परवान चढ़ती नजर नहीं आ रही। अदालत में मामला लटका है। प्रबंधक और प्रधानाचार्य पहले ही पल्ला झाड़ चुके हैं। एनजीओ का विकल्प भी कामयाब नहीं हुआ। कई वर्ष बीतने के बाद भी माध्यमिक स्कूलों में सरकार की इस योजना की शुरूआत नहीं हो सकी।
जिले के 107 माध्यमिक स्कूलों के कक्षा छह से आठ तक के लगभग 40 हजार बच्चों को मिड-डे मील खिलाने की योजना अधर में लटकी है। सबसे पहले शासन ने आदेश जारी किए थे कि अभिभावक और प्रबंधक एसोसिएशन का बैंक में संयुक्त खाता खुलवाकर योजना को चलाया जाए। प्रबंधकों ने हाईकोर्ट की शरण ली तो शासन ने व्यवस्था बदलकर प्रबंधकों के बजाए प्रधानाचार्यों को योजना चलाने के निर्देश जारी कर दिए गए। प्रधानाचार्य परिषद ने भी हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी। मामला लटकते देख दो वर्ष पहले एनजीओ से योजना को चलवाने का ट्रायल लिया गया। कोर्ट के आदेश थे कि जब तक अंतिम फैसला नहीं होता एनजीओ के माध्यम से ही बच्चों तक योजना का लाभ पहुंचना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
प्रधानाचार्य एसोसिएशन के सचिव प्रहलाद सिंह का कहना है कि प्रधानाचार्यों ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा था। एनजीओ का सुझाव दिया गया था। अदालत जो फैसला करेगी प्रधानाचार्य उसका पालन करेंगे। उनके स्तर से कोई रुकावट नहीं है।