मुजफ्फरनगर। ख्यातिलब्ध साहित्यकार अशोक वाजपेयी ने कहा कि हमारा समय सरलीकरण और सामान्यीकरण का है। कविता इनके विरुद्ध अथक सत्याग्रह है। कविता का सच अधूरा होता है, वह पूर्ण तब होता है, जब हम उसमें थोड़ा सच और मिलाते हैं। यह कविता उस समाज में लिखी जा रही है जो समाज अपने साहित्य और लेखकों से बेखबर है।
समकालीन हिंदी कविता दशा और दिशा विषय पर आयोजित गोष्ठी में अशोक वाजपेयी ने कहा कि हिंदी में ही नहीं, बल्कि सारे संसार में कविता एक जरूरी, लेकिन अल्पसंख्यक कार्रवाई है। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि कविता की समझा और जगह बढ़ाने-बचाने का काम जिन संस्थाओं को करना चाहिए वे इस ओर उदासीन हैं। इस समय सारी दुनिया की कविता में कोई आंदोलन नहीं है। विशिष्ट अतिथि डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा कि भाषा पर केवल साहित्यकारों का ही अधिकार नहीं है। आम आदमी ही भाषा को बनाता और बचाता है। साहित्यकार जगदीश प्रसाद सविता ने कहा कि आज जिस काल में कविता लिखी जा रही है, वह अद्भुत और विचित्र है। संयोजक रोहित कौशिक, केडी गौतम, अमित, धर्म सिंह, सोनम गोयल, चंद्रकांत कौशिक, डॉ बीके मिश्र, बलदेव कृष्ण कपूर, बीएस त्यागी, परमेंद्र सिंह, शिवकुमार, सुरेंद्र वत्स, मोहित कौशिक ने विचार रखे।