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रिजेक्ट प्रजाति ‘1148’ का क्षेत्रफल बढ़ा

Mon, 20 Oct 2014 05:31 AM IST
Muzaffar nagar
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मुजफ्फरनगर। जिले में अस्वीकृत गन्ना प्रजाति 1148 का क्षेत्रफल बढ़ने से गन्ना विभाग और चीनी मिलों की मुश्किलें बढ़ गई है। उप्र गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर के निदेशक बक्शी राम ने जिले की सभी चीनी मिलों को पत्र भेजकर बताया कि इस अस्वीकृत प्रजाति का क्षेत्रफल इस बार बढ़ गया है।
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शोध संस्थान के निदेशक द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया कि वर्ष 2012-13 में 862 हेक्टेयर 2013-14 में 4393 हेक्टेयर था, जो वर्ष 2014-15 में बढ़कर 13343 हेक्टेयर हो गया है। इस प्रजाति को वर्ष 1962 में गन्ने की खेती हेतु स्वीकृत तथा 1992 में इसे अस्वीकृत घोषित किया गया। गन्ना शोध परिषद की सर्वे रिपोर्ट 2014 में इस गन्ना प्रजाति में लाल सड़न रोग का अधिक आपतन पाया गया है। इस संबंध में तितावी चीनी मिल के वरिष्ठ प्रबंधक गन्ना प्रवीन तोमर ने बताया कि पिछले दिनों उप्र गन्ना शोध परिषद के सेवानिवृत्त कीट एवं रोग विशेषज्ञ डॉ मैनेजर सिंह ने तितावी चीनी मिल क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाले दर्जनों गांवों का दौरा करने के बाद बताया कि गन्ना प्रजाति 1148 और 802 में भयंकर रूप से लाल सड़न रोग से ग्रसित है। जगह-जगह खड़े खेतों में इस प्रजाति के गन्ने सूख रहे है।

लाल सड़न रोग के लक्षण:
रोग की प्रारंभिक अवस्था में पौधे के अगोले की तीसरी और चौथी पत्ती किनारे से सूखने लगती है। धीरे-धीरे पूरा पौधा सूख जाता है। ऊपर से गन्ने की पोरिया कुछ-कुछ बैगनी रंग की हो जाती है। लाल रंग का गूदा एवं चौड़ाई में चकते दिखाई देते हैं। कभी-कभी गूदे में भूरे रंग की फफूंदी भी दिखाई देती है। गूदे में सिरके जैसी तीक्ष्ण गंध आती है। गांठों से गन्ना आसानी से टूट जाता है।
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