मुजफ्फरनगर। जिला पेयजल एवं स्वच्छता समिति की बैठक में जलनिगम के अधिकारी सीडीओ के सवालों का जवाब नहीं दे सके। 103 करोड़ के हैंडपंप लगाए जाने के मामले में जब सीडीओ ने सभी हैंडपंपों की सूची मांगी तो अधिकारी बगले झांकने लगे। जल गुणवत्ता परीक्षण पर भी विभागीय अधिकारियों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
विकास भवन में हुई बैठक में जल निगम के अधिकारियों ने बताया कि पेयजल योजना में जिले में 103.5 करोड़ की लागत से 28250 हैंडपंप लगाए गए हैं। समिति के सदस्य नरेंद्र त्यागी ने कहा कि जल निगम में हैंडपंप लगाने में बड़ा खेल हुआ है। हैंडपंप कहां लगे हैं, इसका सत्यापन होना चाहिए। सीडीओ अवनीश शर्मा ने इस पर विभागीय अधिकारियों से जानकारी मांगी तो वह बगले झांकने लगे। सीडीओ ने सोमवार को सूची उपलब्ध कराने के आदेश दिए। पहली बैठक में सत्यापन का प्रस्ताव पास होने के बाद भी सत्यापन नहीं कराए जाने का मामला उठा। इस संबंध में विभाग को रिपोर्ट देने के लिए निर्देश दिए। जल निगम द्वारा जल गुणवत्ता परीक्षण कितने गांवाें में कराया गया, इस पर भी अधिकारी जवाब नहीं दे पाए। सीडीओ ने छह गांवों में चल रही 4249 करोड़ की योजना का तुरंत पूरा करने के आदेश दिए। बिलासपुर में टंकी निर्माण का कार्य बंद होने पर रोष जताया। डीडीओ बलवंत सिंह, पीडी वीपी श्रीवास्तव, डीपीआरओ महेंद्र सिंह, सहायक अभियंता लघु सिंचाई एमए खान, कार्यवाहक अधिशासी अभियंता जल निगम विनय कुमार, सहायक अभियंता ब्रजवीर सिंह, विजय सिंघल, अभिनव के हरेंद्र सिंह, जिला पंचायत सदस्य नरेंद्र त्यागी आदि रहे।