जिले की आठ चीनी मिलों पर किसानों का 928 करोड़ बकाया है। चीनी मिलों में किसानों ने इस वर्ष 29 अरब 84 करोड़ 35 लाख का गन्ना डाला है। मिलों ने किसानों को 20 अरब 55 करोड़ 43 लाख का भुगतान कर दिया है।
जनपद में सबसे ज्यादा गन्ने की खरीद खतौली चीनी मिल ने की है। यह चीनी मिल 74.43 प्रतिशत भुगतान कर चुकी है। तितावी चीनी मिल ने 67 प्रतिशत, भैसाना ने 46.38 प्रतिशत, मंसूरपुर ने 71.75 प्रतिशत, टिकौला ने 88.57 प्रतिशत, खाईखेड़ी ने 57.21 प्रतिशत, रोहाना ने 62.60 प्रतिशत, मोरना ने 75.33 प्रतिशत भुगतान किया। भुगतान करने में टिकौला चीनी मिल पहले नंबर पर है जबकि भैसाना सबसे फिसड्डी है।
चीनी मिल खरीददारी बकाया
खतौली 707.75 करोड़ 180.96 करोड़
तितावी 507.71 करोड़ 163.48 करोड़
भैसाना 460.59 करोड़ 246.98 करोड़
मंसूरपुर 446.20 करोड़ 126.05 करोड़
टिकौला 401.13 करोड़ 45.83 करोड़
खाईखेडी 212.16 करोड़ 90.78 करोड़
रोहाना 92.78 करोड़ 34.70 करोड़
मोरना 154.05 करोड़ 40.10 करोड़
केंद्र के पैकेज को स्थायी समाधान नहीं मान रहे किसान
मुजफ्फरनगर। केंद्र सरकार द्वारा गन्ना किसानों के लिए सात हजार करोड़ रुपये बेल आउट पैकेज दिए जाने की घोषणा से गन्ना उत्पादकों के बकाया भुगतान की उम्मीदें जग गई है। चीनी के दाम घटने के बाद किसानों के खातों में चीनी मिलों ने भुगतान की रकम भेजने में हाथ खींच लिए थे, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया।
पैकेज की घोषणा की पीछे गन्ना बेल्ट में कैराना और नूरपुर में हुए उप चुनाव में मिली हार और सब्जी और दूध के वाजिब दाम न मिलने को लेकर किसानों के आंदोलन है। पैकेज की घोषणा पर किसान संगठनों और गन्ना उत्पादकों की अलग-अलग प्रतिक्रिया है।
देर से दिया गया पैकेज: टिकैत
भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि गन्ना किसानों को सात हजार करोड़ रुपये का बेल आउट पैकेज दिया जाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। यह केवल चुनावी शिगूफा है। पहले भी केंद्र सरकारें पैकेज दे चुकी है, मगर किसानों की दिक्कतें दूर नहीं हुई है। चीनी की खपत का स्थायी समाधान ढूंढा जाए। भुगतान को लेकर आगे से समस्या पैदा न हो इसके लिए नीति तैयार की जाए।
चीनी मिलें ईमानदारी से दे बकाया: पूरण
भारतीय किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरण सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों को जो पैकेज दिया है, उसका समिति और मिल प्रबंधन ईमानदारी से भुगतान करें। पिछली सरकारों में मिले पैकेज का मिल मालिक दुरुपयोग करते रहे हैं। मिल और समितियां पहले अपने टैक्स और कमीशन काट लेते हैं, जिससे किसान लाभ से वंचित रह जाता है।
कर्ज में हैं गन्ना उत्पादक
चरथावल क्षेत्र के नसीरपुर गांव के किसान तरसपाल सिंह पुंडीर कहते हैं कि देर आए दुरुस्त आए। सरकार के पैकेज की घोषणा से किसानों को उनके बकाये का भुगतान मिलेगा। भुगतान नहीं होने से गन्ना उत्पादक कर्ज में हैं। साहूकारों से मोटे ब्याज ऋण लेने से मुक्ति मिलेगी। भुगतान की रकम तत्काल किसानों के खातों में जाएगी तो उनके रुके काम पूरे होंगे।
एकमुश्त हो भुगतान
सदर ब्लाक के तिगरी गांव के किसान महेंद्र सैनी कहते हैं कि किसान को मिलों में गन्ना डालने के बाद उम्मीद रहती है कि समय से उनका भुगतान हो जाएगा, जब पैसा फंस जाता है तो वह तनाव में आ जाता है।
पैसा समय से और एकमुश्त मिल जाए तो उसके काम आ जाता है। केंद्र सरकार ने चलो किसानों की चिंता तो की। अब सरकार यह भी ध्यान रखना चाहिए कि समय से किसानों को पैसा जारी हो रहा है या नहीं।