किसी भी पार्टी को सभी वार्डों में नहीं मिले प्रत्याशी
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका परिषद के 50 वार्डों में कोई भी पार्टी चुनाव नहीं लड़ रही है। किसी भी राष्ट्रीय राजनीतिक दल को सभी वार्डों में प्रत्याशी नहीं मिले हैं। देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा के सामने मुस्लिम वार्डों में प्रत्याशियों का टोटा रहा। प्रदेश की दूसरे नंबर की पार्टी सपा हिंदू वार्डों में प्रत्याशियों के लिए जूझती रही। पालिका के 50 वार्डों में से कांग्रेस 43, भाजपा 40, बसपा 36 और सपा 26 वार्डो में चुनाव लड़ रही है।
राजनीतिक दलों का जनाधार धर्म और जाति के आधार पर किस तरह सिमट रहा है। नगर पालिका चुनाव में सभासद के लिए सभी वार्डों में प्रत्याशी नहीं मिलना इसका उदाहरण है। नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष पद पर पांच राजनीतिक दलों के प्रत्याशी मैदान में हैं। इसमें कांग्रेस, भाजपा, बसपा, सपा और रालोद शामिल है। सभी राजनीतिक दलों की यह तैैयारी थी कि वह पालिका के सभी 50 वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारे। वार्ड के लिए प्रत्याशियों से आवेदन भी मांगे गए। समस्त प्रक्रिया के बाद किसी भी राजनीतिक दल को सभी वार्डों में प्रत्याशी नहीं मिले हैं।
भाजपा देश की बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करती है। इस पार्टी को भी यहां 40 वार्डों में प्रत्याशी उतारकर संतोष करना पड़ा। दस मुस्लिम बहुल वार्डों में भाजपा के सिंबल पर कोई भी चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हुआ। कांग्रेस धर्म निरपेक्ष पार्टी होने का दावा करती है। तमाम प्रयासों के बाद भी 43 वार्डों में ही प्रत्याशी उतार सकी है। बसपा ने पूरे प्रयास करने के बाद 36 वार्डो में ही सिंबल दिए है। कुछ हिंदू बहुल वार्डों में बसपा को प्रत्याशी नहीं मिल पाए। सपा प्रदेश की दूसरे नंबर की बड़ी पार्टी होने का दावा करती है। सपा केवल 26 वार्डों में ही प्रत्याशी उतार पाई है। हिंदू बहुल अधिकतम वार्डों में उसके पास प्रत्याशी नहीं है। कुछ ओबीसी और मुस्लिम वार्डों में ही चुनाव लड़ा पा रही है। रालोद मात्र छह वार्डो में ही सिंबल पर चुनाव लड़ पा रहा है।
मुस्लिमों को भी टिकट दिए
मुजफ्फरनगर। बीजेपी जिलाध्यक्ष रुपेंद्र सैनी का कहना है कि इस पार्टी ने सभासद के कुछ मुस्लिमों को भी टिकट दिए हैं। बावजूद इसके दस मुस्लिम बहुल वार्ड ऐसे हैं, जिनमें प्रत्याशी नहीं मिल पाए।
अधिक प्रत्याशियों के कारण टिकट नहीं
मुजफ्फरनगर। सपा जिलाध्यक्ष गौरव स्वरूप का कहना है कि हमारे कुछ मुस्लिम बहुल वार्ड भी ऐसे हैं, जहां हम अधिक दावेदार होने के कारण टिकट नहीं दे पाए। हां कुछ वार्ड ऐसे रहे जहां से प्रत्याशी नहीं आए।
हम सबसे ज्यादा वार्डों पर लड़ रहे
मुजफ्फरनगर। कांग्रेस नेता और निवर्तमान चेयरमैन पंकज अग्रवाल का कहना है कि पालिका में उनकी पार्टी सबसे ज्यादा वार्डों में लड़ रही है, जो कि वार्ड बचे है उनमें प्रत्याशी इसलिए घोषित नहीं हो पाया कि दावेदार कई थे।
बसपा पहली बार इतने वार्डों में लड़ी
मुजफ्फरनगर। बसपा के जिलाध्यक्ष रामनिवास पाल का कहना है कि वार्ड सभासद का चुनाव पहली बार सिंबल पर लड़ रही है। हमें जितनी उम्मीद थी उससे अच्छा रेस्पोंस मिला है।