फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देश के चुने 100 आईपीएस को मुजफ्फरनगर दंगे पर दी गई थी ट्रेनिंग

विज्ञापन
विज्ञापन
एडीजी आशुतोष पांडेय ने हैदराबाद अकादमी में पढ़ाया था पाठ
विज्ञापन

मुजफ्फरनगर। देश को झकझोर देने वाले मुजफ्फरनगर दंगे का पाठ हैदराबाद की सरदार बल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में आईपीएस को पढ़ाया गया था। दंगे के बाद जब जिले में साइलेंटवार में हत्याएं बढ़ी, तब आगरा रेंज के आईजी रहे आशुतोष पांडे को मेरठ जोन का अतिरिक्त चार्ज दिया गया। पांडे जिले के कई साल एसएसपी रह चुके थे। उन्हें यहां की भौगोलिक, राजनीतिक और सामाजिक स्थिति का अनुभव था। उनके प्रयास से साइलेंटवार के जानलेवा हमले रुके। फसलों की जलाने के षड़यंत्र भी थम गये। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत देशभर से बुलाये गये 100 एसपी, डीआईजी को हैदराबाद बुलाया, जहां फिलहाल लखनऊ में तकनीकी एडीजी आशुतोष पांडये ने बताया कि मुजफ्फरनगर में दंगा क्यों और कैसे भड़का था। ग्रामीण इलाके में हिंसा फैलने से क्या दिक्कते प्रशासन के सामने आयी। चार सप्ताह यह ट्रेनिंग चली थी। दंगे पर नियंत्रण बनाने में क्या-क्या रणनीति बनाई गई थी। लखनऊ पुलिस वीक में भी इस दंगे पर पांडे ने लेक्चर दिया था।

निलंबित हो गए थे एसएसपी दुबे
मुजफ्फरनगर। कवाल की घटना के बाद एसएसपी मंजिल सैनी की जगह जिले के पुलिस कप्तान बनाये गए सुभाष चंद दुबे को सात सितंबर, 2013 को हिंसा भड़काने के बाद शासन ने निलंबित कर दिया गया था। खालापार में हुई सभा में भी दूसरे समुदाय से ज्ञापन लेने जाने पर उनकी कार्यशैली पर सवाल उठे थे। उसके बाद जिले में एसएसपी रह चुके आईपीएस प्रवीण कुमार को भेजा गया। जिले के बिगड़े हालात सुधारने में उनकी कोशिशें नाकाफी रही। तत्कालीन अखिलेश सरकार ने फिर हरि नारायण सिंह को जिम्मा सौंपा। उन्हें आईजी आशुतोष पांडे का निर्देशन मिला, जिसकी वजह से दंगे का आक्रोश थामने में कामयाबी मिली।
विज्ञापन
विज्ञापन


दंगे पर बनी थी फिल्म, लिखी गई किताब
मुजफ्फरनगर। कवाल कांड की दंगे में बदली घटना पर एक फिल्म भी बनी। 17 नवंबर, 2017 को रिलीज हुई फिल्म मुजफ्फरनगर द बर्निंग लव का निर्देशन मनोज कुमार ने किया था। दंगे पर आधारित फिल्म में दो दिलों के प्रेम की भावनात्मक कहानी थी। सेंसर बोर्ड ने भी फिल्म को अनुमति दी थी। पश्चिम के कई शहरों में ये मूवी लगी। उधर, मुजफ्फरनगर दंगे पर फैसला आपका पुस्तक लिखी गई, जिसे बागपत के अधिवक्ता जगबीर सिंह ने लिखा था। यह पुस्तक भी चर्चाओं में रही।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें