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सूरा सो पहचानिए, जो लरै दीन के हेत, पुरजा-पुरजा कट मरै कबहू ना छाडे खेत

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हिंदू धर्म की रक्षा के लिए चारों साहिबजादों ने बलिदान दिया: लखविंदर
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मुजफ्फरनगर। सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह महाराज के चारों साहिबजादों का शहीदी पर्व मनाया गया। गांधी कालोनी के गुरुद्वारा में सुखमनी साहिब सेवा सोसायटी की ओर से महान कीर्तन दरबार आयोजित किया गया।
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कीर्तन दरबार में स्वर्ण मंदिर अमृतसर से आए विश्व प्रसिद्ध भाई लखविंदर सिंह ने कीर्तन एवं कथा की। उन्होंने संगतों को उन दिनों की याद दिलाई, जब हिंदू धर्म की रक्षा को गुरु तेगबहादुर ने अपना बलिदान दिया और धर्म को बचाया। उन्हीं के पदचिह्नों पर चलते हुए भारत की आन बान और शान के लिए चारों साहिबजादों बाबा अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह और माता गुजर कौर ने अपना बलिदान दिया। अजीत सिंह और जुझार सिंह मुगलों के साथ युद्ध करते शहीद हुए। उन्होंने गुरुवाणी की पंक्ति सूरा सो पहचानिए, जो लरै दीन के हेत, पुरजा-पुरजा कट मरै कबहू ना छाडे खेत को सच किया। जोरावर सिंह और फतेह सिंह को सरहिंद की दीवार में इस्लाम कबूल नहीं करने की वजह से जिंदा चिनवा दिया गया और उनकी दादी मॉ गूजर कौर को किले के ऊंचे बुर्ज से धक्का देकर शहीद कर दिया गया। इस तरह देश और धर्म की रक्षा में गुरु गोविंद सिंह महाराज का सारा परिवार शहीद कर दिया गया। सिख समाज इन महान शहीदों के महान बलिदान को नतमस्तक होते हुए एक सप्ताह कोई खुशी नहीं मनाता। सादा खानपान रखता है और बहुत ही वैरागी जीवन रखता है। भाई लखविंदर के मुख से साहिबजादों के शहीद होने की बातें सुन संगत की आंखें भर आई। एतिहासिक कविता और गुरुवाणी की प्रस्तुति भी दी। आयोजन में वजीर सिंह राजा, सुरजीत सिंह, कुलदीप सिंह, टीटू सिडाना, बोबी छाबड़ा, दीवप्रीत सिंह, टोनी खुराना, हरमोहन सिंह सेखो, रौनक, सोनू चावला, सतनाम सिंह भट्टी, चिंटू, रविंद्र सिंह, रवि, सुरप्रीत सिंह, सुनील शर्मा, पुनीत आदि का सहयोग रहा।
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