भारतीय संस्कृति के उपासक थे महामना : आर्य
मुजफ्फरनगर। गुरुकुल आर्यावृत बुड़ीना कलां में भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर वैदिक यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर विद्यार्थियों ने महामना की देशभक्ति, राष्ट्र सेवा को नमन किया। मुख्य अतिथि आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि शिक्षित भारत के निर्माण में महामना मालवीय का अतुलनीय योगदान है। युवा पीढ़ी उनके जीवन मूल्यों को धारण करें।
तितावी क्षेत्र के गांव बुड़ीना कलां में स्थित गुरुकुल आर्यावृत में आयोजित मालवीय जयंती समारोह में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि महामना भारतीय संस्कृति के उपासक थे। स्वतंत्रता संग्राम में मुल्क की आजादी को संघर्ष किया। हिंदी, संस्कृत और वैदिक ज्ञान के प्रचार-प्रसार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना कर समाज और राष्ट्र को नई दिशा दी। लाला लाजपत राय, स्वामी श्रद्धानंद के साथ मिलकर लोक सेवा संघ का गठन किया। हिंदू समाज की एकता, रक्षा और उन्नति को हिंदू महासभा बनाई। मालवीय का नि:स्वार्थ जीवन युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणासोत्र है। गुरुकुल संस्थापक श्रवण कुमार आर्य ने कहा कि महापुरुषों के सदाचार, त्याग, देशप्रेम, चरित्र, अनुशासन से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करें। मालवीय ने कुंभ मेले में वैदिक ज्ञान की ज्योति फैलाने को ऋषि दयानंद का ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश बांटे थे। कार्यक्रम में योग शिक्षा में श्रेष्ठ हर्ष आर्य, हिमांशु आर्य, अनुज आर्य, अंशुल आर्य, श्रीकांत आर्य को आचार्य गुरुदत्त आर्य ने वैदिक साहित्य भेंट कर पुरस्कृत किया। ग्राम प्रधान सचिन, राजपाल आर्य, रामकिशन आर्य को भी साहित्य देकर सम्मानित किया। अनिल आर्य, धन प्रकाश शास्त्री, प्रदीप, विनोद कुमार, प्रीतम चौहान, अमन, अंकित आदि मौजूद रहे। संचालन प्रदीप कुमार ने किया।