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पहले ही अलाभकारी था, अब और भी नीचे पहुंचा गन्ना मूल्य

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मुजफ्फरनगर। प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी नहीं की है। पिछले साल के दाम को ही इस बार लागू कर दिया गया। सरकार के इस फैसले पर राजनीतिक दलों के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि पहले से ही किसानों को सही मूल्य नहीं मिल रहा था। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाना किसानों के साथ अत्याचार है। इस दौरान प्रदेश सरकार पर किसान विरोधी होने के आरोप लगाते हुए रालोद ने शनिवार को कलक्ट्रेट पर आंदोलन करने का ऐलान किया है।
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पहले जितनी भी नहीं छोड़ी किसानों की आय
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि सरकार किसानों को बर्बाद कर रही है। किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था। लेकिन अब तो पहले जितनी भी आय नहीं छोड़ी। बिजली, खाद, पेस्टीसाइड के दाम बढ़ रहे हैं पर गन्ने के दाम नहीं बढ़ाए गए। किसानों की उम्मीद सरकार ने तोड़ दी है। गन्ना पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल है। किसान बैंक का ऋण कैसे चुकाएगा। सरकार केवल उद्योगपतियों को सुविधा दे रही है। कहा कि विचार विमर्श के बाद अगला कदम उठाया जाएगा।

सरकार का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण
मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन पर आंदोलन में शामिल भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि मायावती और अखिलेश यादव ने गन्ना मूल्य 40-40 रुपये बढ़ाया था। पर योगी आदित्यनाथ ने कुछ नहीं बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सरकार का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है। खाद, बिजली, पानी के दाम बढ़ा दिए गए हैं। उधर, गन्ना मूल्य का भुगतान भी समय पर नहीं किया जा रहा।
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गन्ना किसानों का अहित
वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक का कहना है कि सरकार ने गन्ना किसानों के साथ मजाक किया है। पेस्टीसाइड, खाद आदि के दाम बढ़ाए। साथ ही फसल के दाम डेढ़ गुना करने की बात कही थी। लेकिन कुछ नहीं बढ़ाया गया। पहले ही लाभ नहीं हो रहा था। अब दाम नीचे चले गए है। सरकार को स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार गन्ना मूल्य निर्धारित करना चाहिए था।

किसानों को तबाह करने का काम किया
वरिष्ठ रालोद नेता एवं पूर्व मंत्री योगराज सिंह का कहना है कि सरकार अपनी बात पर कायम नहीं रही है। पहले पांच वर्षों में 125 रुपये तक प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी हुई थी। हालांकि इस सरकार ने कुछ नहीं बढ़ाया। यह किसानों के साथ अनुचित है।

रालोद का आंदोलन आज
रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी ने कहा कि योगी सरकार ने किसानों की उम्मीद को खत्म कर दिया है। यह किसानों की कमर तोड़ने वाला फैसला है। सरकार को गन्ना मूल्य कम से कम 400 रुपये प्रति क्विंटल करना चाहिए था। एक तरफ किसान की आय दोगुनी करने की बात सरकार कहती है। वहीं, दूसरी तरफ गन्ने के दाम में कोई इजाफा नहीं किया जाता। रालोद शनिवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करेगा।

मंदिर-मस्जिद में उलझी सरकार
वरिष्ठ सपा नेता एवं पूर्व मंत्री मुकेश चौधरी ने कहा कि भाजपा नेताओं को मंदिर-मस्जिद से फुर्सत नहीं। किसानों के बारे में सोचने की तो उम्मीद करना मुश्किल है। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। युवा बेरोजगार हो रहे हैं। लेकिन इन्हें किसी की चिंता नहीं है। गन्ना किसानों का उत्पीड़न हो रहा है। उन्हें पर्चियां भी नहीं मिल रहीं हैं। मजबूरन 150 से 170 रुपये क्विंटल गन्ना बेचना पड़ रहा है।
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