कंगारू मदर केयर से बचाएंगे नवजात
मुजफ्फरनगर।
कमजोर बच्चे तमाम कवायदों के बाद भी मौत के मुहाने तक पहुंच रहे है, जिन्हें बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहल की है। अब इससे जल्द निजात मिलेगी। महिला अस्पताल की नई बिल्डिंग में कंगारू मदर केयर योजना चालू की जाएगी। इसमें मां अपने नवजात शिशु की पूरी देखभाल के साथ उसकी कंगारू केयर कर सकेगी।
जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन 20 से अधिक डिलीवरी होती है। इनमें कई नवजात बच्चे ऐसे होते हैं, जो समय से पहले जन्म लेते हैं। यह नवजात नौ माह के बजाय 7, 8 माह में पैदा होते हैं। समय से पहले जन्म शिशु के शारीरिक विकास को रोक रहा है। इसके चलते नवजात बच्चे औसत वजन ढाई किलो से कम वजन के जन्म ले रहे हैं। बच्चों में 1.80 किलोग्राम, दो किलोग्राम तक वजन निकल रहा है। ऐसे में बच्चों को पूरी तरह से सुरक्षित नहीं माना गया। इन बच्चों को कंगारू केयर की जरूरत होती है। क्योंकि विभाग के पास इनक्यूबेटर (समय से पूर्व जन्मे शिशु को जिंदा रखने की मशीन) की सुविधा मौजूद नहीं है। अब बच्चों को कंगारू मदर केयर योजना का लाभ देकर बचाया जाएगा। नई बिल्डिंग मिलने के बाद विभाग ने योजना को चालू कराने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। इस योजना के लिए मां और बच्चे को पूर्ण रूप से अलग कमरा चाहिए, जो कि अभी तक विभाग के पास नहीं होते थे। डिलीवरी अधिक होने के कारण जज्जा-बच्चा को भर्ती करने की चिंता थी। इसके चलते नवजात बच्चों को इनक्यूबेटर मशीन में रखने के लिए मेरठ, दिल्ली, गाजियाबाद, चंडीगढ़ की दौड़ लगानी पड़ती थी। ऐसे में नवजात काजीवन खतरे में रहता था। सीएमएस डॉ अमिता गर्ग ने बताया कि योजना को लेकर काम प्रारंभ कर दिया है। शनिवार को चिकित्सकों को इसकी ट्रेनिंग दी गई है कि मां और शिशु को थैरेपी के वक्त किस तरह से ट्रीट करना है।
क्या है कंगारू केयर योजना
मुजफ्फरनगर। आस्ट्रेलियन जीव कंगारू समय से पहले बच्चे को जन्म देता है। उसके बाद वह प्री-मैच्योर बच्चों को अपनी थैली में साथ रखती है। बच्चों के पूर्ण विकसित होने के बाद उन्हें थैली से बाहर निकालती है। इसी तरह अब विभाग भी नवजात बच्चों को उसकी मां के सीने से लगाकर रखेगा।
एक दिन में 10 से 12 घंटे की थेरेपी
मुजफ्फरनगर। सीएमएस डॉ अमिता गर्ग बताती हैं कि एक बार में कम से कम एक घंटा तथा एक दिन में 10 से 12 घंटे मां, पिता अपने बच्चे को कंगारू थेरेपी दे सकता है। कंगारू केयर से मां में दूध बढ़ता है, साथ ही बच्चे में भी सुरक्षात्मक गुणों का विकास होता है।