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शिक्षाऋषि के अनन्य भक्त बन गए थे वीपी सिंह

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शिक्षाऋषि के अनन्य भक्त बन गए थे वीपी सिंह
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मुजफ्फरनगर। पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह को उनके स्मृति दिवस पर भूला दिया गया। एक वक्त देश की राजनीति का केंद्र बिंदु रहे राजा मांडा का जिले से गहरा लगाव रहा था। वीतराग स्वामी कल्याण देव की सेवा और सादगी ने उन्हें शिक्षा ऋषि का भक्त बना दिया था। अपने परिवार के साथ वे कई बार शुक्रताल आए। उन्होंने ही वीरेंद्र वर्मा को पंजाब के गवर्नर की जिम्मेदारी सौंपी थी।
पूर्व पीएम वीपी सिंह की नौवीं पुण्यतिथि पर जिले में उनकी याद में कोई कार्यक्रम नहीं किया गया। देश की सियासत में उनकी शख्सियत सबसे जुदा थी। चाहे यूपी के सीएम बने या देश के प्रधानमंत्री, वीपी सिंह को मुजफ्फरनगर से आत्मिक लगाव हो गया था। शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याणदेव के निष्काम जीवन से राजा मांडा अभिभूत रहे। 26 जून 1980 को वीतराग संत के बुलावे पर सीएम रहते वीपी सिंह पहली बार शुक्रताल आए थे। शुकतीर्थ में उन्होंने पर्यटन केंद्र का शिलान्यास किया था। वे जब भी जिले में आते, स्वामी से आशीर्वाद लेना नहीं भूलते थे। पूर्व विधायक सोमांश प्रकाश बताते हैं कि गांधी पालीटेक्निक में 27 नवंबर 1989 को वीपी सिंह धर्मपत्नी सीता देवी के साथ स्वामी जी से मिलने पहुंचे और बड़े शौक से मट्ठा पिया। देश में बदले राजनीति परिदृश्य में जब जनता दल का गठन हुआ, तब सोमांश प्रकाश को ही राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया था। सत्ता परिवर्तन के बाद दो दिसंबर 1989 को वीपी सिंह देश के आठवें प्रधानमंत्री बने थे। जिले के शीर्ष राजनीतिज्ञ वीरेंद्र वर्मा राज्यसभा सदस्य चुने गए थे। उस वक्त पंजाब आतंकवाद से झुलस रहा था। वीपी सिंह और चौधरी देवीलाल ने वर्मा को आठ जून 1990 को पंजाब के राज्यपाल का जिम्मा सौंपा था। वरिष्ठ कांग्रेस नेता उमादत्त शर्मा बताते हैं कि 18 सितंबर 1991 को शिरी फोर्ट स्टेडियम दिल्ली में वीरेंद्र वर्मा के 75वें जन्मदिन समारोह में मुजफ्फरनगर और शामली के लोग उमड़े थे। उप राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा की मौजूदगी में जब पहलवान चंदगीराम ने वर्मा की टोपी उतार कर पगड़ी पहनाई, तो उनकी टोपी वर्मा की पत्नी रामेश्वरी देवी ने संभाल कर रख ली। पूर्व पीएम वीपी सिंह ने तब कहा था कि टोपी संभाल कर रखी जाती रही है, इसीलिए वर्मा के लंबे राजनीतिक जीवन में कोई दाग नहीं लगा।
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हल चला कर भूमि कब्जामुक्त कराएंगे
मुजफ्फरनगर। भूमाफिया के खिलाफ कलक्ट्रेट में बीते 22 साल से धरनारत मास्टर विजय सिंह लखनऊ में पूर्व पीएम वीपी सिंह से हुई भेंट को नहीं भूले हैं। विधानसभा के सामने धरने पर बैठे विजय सिंह वर्ष 2007 में उनसे मिले और शामली के चौसाना में सैकड़ों बीघा भूमि पर अवैध कब्जे की जानकारी दी, तब वीपी सिंह कुछ अस्वस्थ थे। उन्होंने कहा था कि स्वस्थ होते ही वे खुद हल चलाकर भूमि को कब्जामुक्त कराएंगे। वंचितों, शोषितों, पिछड़ों और दलितों के उत्थान के लिए वह समर्पित रहे।
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