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देवबंद में 80 फीसदी गेहूं की कटाई, खरीद में नहीं आई तेजी

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देवबंद। अब तक 80 फीसदी गेहूं की कटाई व थ्रेसिंग का कार्य पूरा हो चुका है, बावजूद इसके गेहूं की सरकारी खरीद में अभी तक तेजी नहीं आई, जबकि गेहूं खरीद आरंभ हुए एक माह बीतने को है। मंडी अधिकारियों की माने तो ठेकेदार घर पर जाकर किसानों से गेहूं खरीद रहे हैं जिस कारण मंडी में गेहूं कम पहुंच रहा है।
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बुधवार तक नवीन मंडी में आरएफसी ने 961 क्विंटल गेहूं की खरीद की है, जबकि 80 फीसदी से अधिक गेहूं की कटाई व थ्रेसिंग हो चुकी है। मंडी सचिव अरविंद कुमार ने बताया कि शनिवार व रविवार को कोरोना कर्फ्यू तथा सोमवार को महावीर जयंती की छुट्टी होने के कारण मंडी बंद रहने से गेहूं की खरीद नहीं हो सकी। उनका कहना है कि सरकार द्वारा किसानों को किसी भी मंडी में गेहूं बेचने की छूट दिए जाने के कारण जहां बड़े अपना गेहूं सीधे हरियाणा की मंडी में लेकर जा रहे हैं, वहीं छोटे किसानों से ठेकेदार उनके घर पर ही जाकर 1850 रुपये क्विंटल के हिसाब से गेहूं खरीद रहे हैं। मंडी में गेहूं कम आने का एक कारण है भी है कि पहले किसान को रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। तभी जाकर गेहूं की खरीद हो पाती है, लेकिन इन सब झंझटों से बचने के लिए छोटी खेती वाला किसान कम रेट में ही गेहूं बेच रहा है, लेकिन उसमें किसान को करीब 125 रुपये क्विंटल का नुकसान है। क्योंकि यूपी में गेहूं का सरकारी भाव 1975 रुपये क्विंटल है। वहीं, किसान श्यामवीर त्यागी, आदेश त्यागी, लोकेश शर्मा, विश्वास चौधरी और प्रविंदर चौधरी ने बताया कि कोरोनाकाल में पंजीकरण तथा लॉकडाउन में मंडी बंद रहने आदि झंझट से बचने के लिए किसान गांव में ही ठेकेदारों को कम दाम पर गेहूं बेच रहे हैं।
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