निजी स्कूलों की वाहन जांच में 76 वाहन मानकों में सही नहीं मिले। इनमें चार वाहनों की हालत बदतर मिली। रविवार को कुल 324 वाहनों की जांच की प्रक्रिया पूरी की गई। ये सभी वह वाहन हैं, जो बच्चों को स्कूल तक छोड़ने और वापस घर तक लाने का काम करते हैं।
प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने निजी स्कूलों के वाहनों में खामियों पर सख्ती बरतते हुए प्रदेश के सभी जनपदों में एआरटीओ को इनकी जांच के आदेश दिए हैं। निजी स्कूलों के द्वारा बच्चों को लाने और ले जाने के लिए प्रयोग किए जा रहे वाहनों की जांच में स्कूलों का गड़बड़झाला सामने आया है।
एआरटीओ प्रशासन राजीव कुमार बंसल ने जनपद के सभी निजी स्कूलों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को नोटिस देकर गत सप्ताह सभी वाहनों को भौतिक सत्यापन परीक्षण एवं निरीक्षण करने के लिए नुमाइश मैदान में बुलाया था। इनमें काफी संख्या में नामचीन स्कूलों के वाहन मानक के पैमाने पर खरा नहीं उतरे थे।
इसके बाद नोटिस देकर वाहनों को मानकों के अनुसार दुरुस्त करने के निर्देश एआरटीओ द्वारा दिए गए। इन वाहनों को फिर से जांच पड़ताल के लिए रविवार को एआरटीओ ने नुमाइश ग्राउंड पर मंगवाया। उनके नोटिस पर विभिन्न स्कूलों से 324 वाहन यहां पर पहुंचे। इनमें 238 वाहनों को मानक के अनुसार पाया गया। चार वाहनों में मेजर फाल्ट मिले।
72 वाहन ऐसे पाए गए, जिनमें मानकों में कुछ ही कमियां पाई गई। किसी में गाइडलाइन के अनुसार पेंट आदि नहीं पाया गया। इमरजेंसी सेवाओं के नंबर भी वाहनों पर नहीं लिखे गए थे। फर्स्ट एड बॉक्स भी कई वाहनों में नहीं पाए गए। इन सभी वाहन स्वामियों को नोटिस भेजे जा रहे हैं।
एक सप्ताह का समय दिया गया है। एआरपीटी बंसल ने बताया कि 18 अप्रैल को खामियां पाई जाने वाले वाहनों की दोबारा जांच होगी। स्कूलों के वाहनों में मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जायेगी। जो स्कूल लगातार निर्देशों के बावजूद भी लापरवाही बरतेंगे, उनके विरुद्ध अब कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।