सरकार की नीतियों से किसान आंदोलन को मजबूर
मोरना। भाकियू की पंचायत में जिलाध्यक्ष राजू अहलवात ने कहा कि मोरना मिल के विस्तारीकरण की लेटलतीफी के चलते सरकार ने मोरना क्षेत्र के किसानों को सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है। अगर प्रशासन भाकियू संगठन के बैनर और बोर्ड को उतारता है, तो प्रशासन सीधे टकराव के लिए तैयार रहे। भोपा और निरगाजनी गंगनहर पुल से ओवरलोड कराने की धांधली तुरंत बंद होनी चाहिए। इस दौरान किसानों ने पहले गन्ने का भुगतान, फिर मतदान करने की चेतावनी दी है।
मोरना-शुकतीर्थ मार्ग पर किसानों की समस्याओं के निवारण और सरकार से विभिन्न मांगों को लेकर ब्लाक मोरना के डायरेक्टर विकास के नेतृत्व में पंचायत का आयोजन किया गया। जिसमें राजू अहलवात ने कहा कि मोरना क्षेत्र के किसानों के लिए मोरना मिल विस्तारीकरण विकट समस्या बनी हुई है। सरकार के कानों तक किसानों के बलिदानों की चीख नहीं पहुंचेगी, तब तक बात बनने वाली नहीं है। लेखपाल किसानों को परेशान कर रहा है, जिसका जल्द इलाज किया जाएगा। संचालन करते हुए सर्वेंद्र राठी ने कहा कि भोपा बाखर नगर विद्युत लाइन का सर्वे हो चुका है, लेकिन विभागीय कर्मचारी काम करने को तैयार नहीं है। गांव करहेड़ा के किसानों को मोरना सहकारी समिति नाजायज दबाव बनाकर आम किसान का उत्पीड़न करने में लगी हुई है। योगेश शर्मा ने कहा कि पुलिस कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे करने में जुटी है, जिसका विरोध किया जाएगा। अध्यक्षता कर रहे साधु सिंह ने कहा कि किसानों का गन्ना भुगतान होना चाहिए। किसान आत्महत्या कर रहा है। पंचायत में पुष्पेंद्र प्रधान, राजेश चेयरमैन, हवा सिंह, बिजेंद्र आर्य, उदयवीर सिंह, प्रवीण सहरावत, हवा सिंह, देवेंद्र बाबा, सत्यबीर सिंह, संजय, बिल्लू सरदार, रामपाल सिंह, अमीर अहमद, जावेद, कल्लू, गय्यूरा आदि किसान उपस्थित रहे।