कुर्बानी देकर हक को जिंदा रखा
खतौली। मोहर्रम पर मजलिस को खिताब फरमाते हुए मौलाना गौहर हैदर जैदी ने कहा कि यजीद आतंकवादी है। जो इंसानियत के खिलाफ खड़ा हुआ था।
ग्राम शेखपुरा में हवा महल इमाम बारगाह में आयोजित मजलिस में उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन हजरत मोहम्मद साहब के नवासे है। कुरान की रूह से बेटे है। आपने इंसानियत को बचाने के लिए करबला में कुर्बानी दी। न कि मुसलमानों के लिए। अगर हुसैन यजीद जैसे आतंकी की बादशाहत कबूल कर लेते तो कयामत तक इंसानियत तबाह और बर्बाद हो जाती। यजीद 1400 वर्ष पूर्व इंसानियत के खिलाफ खड़ा हुआ। उसने हलाल को हराम तथा हराम को हलाल करार दिया। नोहाख्वानी शालू जैदी, अरशद जैदी, शैली जैदी ने की। इसके बाद सोगवारों ने मातम पुर्सी कर इमाम हुसैन को खिराजे अकीदत पेश की। इस दौरान अब्बास जैदी, समद जैदी, शुऐब जैदी, जावेद, शैली जैदी, रजी हैदर जैदी, नुसरत जैदी, शहजाद, फूल मियां जैदी, दानिश जैदी राशिद जैदी आदि मौजूद रहे। इसके अलावा गांव गालिबपुर में भी मजलिस का आयोजन किया जा रहा है।
मजलिस में अजादारों ने किया मातम
मोरना। मोहर्रम माह की तीसरी तिथि को आयोजित मजलिस में मौलाना गुलाम इमाम जैदी ने करबला के इतिहास पर प्रकाश डाला। नोहाख्वानी व मातम किया गया। जिसमें शिया सागवारों ने भाग लिया। मोरना स्थित इमामबाड़ा गढ़ी सादात में हुसैनी मजलिस का आयोजन किया गया। जिसमें मौलाना गुलाम इमाम जैदी ने करबला के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पैगंबर के नातियों ने सत्ता को त्याग कर धर्म की रक्षा की और अपनी कुर्बानी देकर हक को जिंदा किया। त्याग व बलिदान के द्वारा ही महानता की पहचान की जाती है। हमें इमाम के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। इस मौके पर समीर जैदी ने नोहाख्वानी की व शबाब हैदर मर्सियाख्वान रहे। आयोजक के रुप में अंजुमने अब्बासिया के मनव्वर जैदी, शददन अली, रईस मोहम्मद, जलाल हैदर, कमर आजम, खुर्रम, अकबर अली, अफरोज अली, शबी उलहसन, मोहम्मद इस्माईल, वसी हैदर, तनवीर जैदी आदि मौजूद रहे। इसके अलावा बेहड़ा सादात ककरौली, टंढेडा, खुजेड़ा, जटवाड़ा, जौली, तिस्सा, बेलड़ा में भी मजलिस जारी हैं।