कांवड़ भारतीय संस्कृति की जीवन धारा : ओमानंद
मुजफ्फरनगर। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि कांवड़ यात्रा भगवान शिव और गंगा के प्रति श्रद्धा भक्ति का संदेश देती है। कांवड़ भारतीय संस्कृति की जीवन धारा की शाश्वत प्रतीक है।
कांवड़ महोत्सव और श्रावण माह की महिमा पर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि प्राचीन काल से कांवड़ भारतीय संस्कृति में रची बसी है। जनमानस में भगवान शिव, गंगा मैया और गंगाजल के प्रति सच्ची श्रद्धा भक्ति का निरंतर प्रवाह ही कांवड़ है। भगवान शिव का जलाभिषेक तथा उपासना भारत ही नहीं, पूरे विश्व में आदिकाल से चली आ रही है। जगत सृष्टा परमात्मा का नाम शिव है। शिव ही समस्त ब्रह्मांड का आधार है। शिव का अर्थ है कल्याणकारी और गंगा जीवन दायिनी, मोक्षदायिनी है। गंगा जल अमृत है। स्वामी ने कहा कि शिव की अनंत विभूतियों से ही यह सारा संसार व्याप्त है। शिव ही सबके आराध्य, स्वामी तथा परमात्मा हैं। श्रावण माह में गंगाजल से आशुतोष के जलाभिषेक का विशेष महत्व है। हर की पौड़ी हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़ की संकल्प यात्रा पूरी करने से भक्तों का लोक परलोक सुधर जाता है। पापों का नाश होता है। भगवान शिव की कृपा से सुख, शांति, समृद्धि, स्वास्थ्य और दीर्घायु जीवन का वरदान मिलता है। कांवड़ यात्रा कल्याणकारी है। कांवड़िय़ों की सेवा से सद्कर्म की प्रेरणा मिलती है।