भिक्षा मांग कर पूरा किया भागवत का संकल्प
मोरना। भिक्षावृत्ति कर एक दंपति ने श्रीमद्भागवत कथा कराने का संकल्प पूरा किया है। घर को त्यागने के बाद हरिदास और सुमतबाई ने देश के तीर्थो में भ्रमण कर भिक्षा मांगी और जीवनयापन किया। शुक्रताल आए तो यहीं के होकर रह गए। गरीबी के कारण उनका वर्षों का व्रत अधूरा था, मगर स्वामी ओमानंद सरस्वती से भेंट के बाद उनकी इच्छा पूरी हो गई।
शुक्रताल में भिक्षा मांगकर जीवन यापन कर रहे हरिदास और सुमतबाई ने भागवत पीठ श्रीशुकदेव आश्रम में अक्षय वट के नीचे अपनी श्रीमद्भागवत कथा कराने का संकल्प पूरा किया। स्वामी प्रत्यक्षानंद भवन में कथा व्यास सुमन कृष्ण शास्त्री ने विधि विधान से भागवत का पूजन कराया। मध्यप्रदेश के जिले दमोह से आए दंपति की इच्छा गरीबी के कारण अधूरी थी। उन्होंने शुकतीर्थ के मंदिरों, शिवालयों में घूम-घूमकर कथा यज्ञ के लिए भिक्षा मांगी। भागवत पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती से वृद्ध दंपति ने मृत्यु पूर्व अपना संकल्प बताया। स्वामी ने उनकी भागवत कथा की व्यवस्था कराई और स्वयं ही शुभारंभ किया। स्वामी ने कहा कि गुरुदेव स्वामी कल्याणदेव ने गरीब की झौपडी में भगवान के दर्शन की बात कही थी। उसी भाव को निभाने के लिए बुजुर्ग दंपति के भावों को पूरा कराया है। भक्त प्रभु को श्रद्धा और भक्ति का भाव देता है। भगवान भाव के भूखे हैं। भक्ति की भव्यता को समझने की शक्ति भागवत से मिलती है। इस मौके पर सीताराम, हर्षमणि, सोनादेवी, राजू आदि मौजूद रहे।