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योग को विश्व ने स्वीकार किया: राज राजेश्वराश्रम

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योग को विश्व ने स्वीकार किया : राज राजेश्वराश्रम
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शुक्रताल (मुजफ्फरनगर)। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में पहुंचे शारदा द्वारिका पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम जी महाराज ने कहा कि योग भारतीय दर्शन का महत्वपूर्ण अंग है। अष्ठांग योग द्वारा व्यक्ति हर प्रकार की रिद्धि-सिद्धि प्राप्त कर सकता है। भारत वर्ष में इस मौलिकता को सारे विश्व ने स्वीकार किया है। यह भारतीय संस्कृति के लिए प्रसन्नता की बात है।
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कहा कि आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व योग कार्यक्रम मनाया जा रहा है। जहां एक ओर विश्व में योग को स्वीकृति मिल रही है, वहीं भारतीय योगाचार्यों द्वारा योग को केवल एक्सरसाइज, पीटी और आसन में परिभाषित किया जा रहा है। योग शारीरिक व्यायाम नहीं है। योग एक आंतरिक घटित होने वाली क्रिया है। शंकराचार्य ने कहा कि योग का वस्तुत: अर्थ है जीवात्मा का परमात्मा का एकाकार होना। योग दिवस पर उन धर्माचार्यों, योगाचार्यों से आग्रह है कि योग के साथ खिलवाड़ न करें। योग को योग ही रहने दें। एक्सरसाइज आदि में परिभाषित न करें। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी अंकित अग्रवाल, नमामी गंगे के सदस्य डॉ. वीरपाल निर्वाल, जिला कुश्ती संघ सचिव अमित राठी, चेयरमैन विनोद शर्मा, स्वामी अजय कृष्ण शास्त्री, प्रधान सुशील शर्मा, गंगा समिति सचिव चौधरी महकार सिंह, पंकज माहेश्वरी, डायरेक्टर संजीव, नीटू सहरावत आदि ने उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया।
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