पुरकाजी में भी खुली रहीं दुकानें
पुरकाजी। भारत बंद के मद्देनजर कस्बे में बंद का असर बेअसर रहा। साप्ताहिक बंदी का दिन होने के बावजूद कस्बे का अधिकांश बाजार पूर्व की भांति खुला रहा।
बृहस्पतिवार को भारत बंद का असर कस्बे में बेअसर रहा और साप्ताहिक बंदी का दिन होने के बावजूद इक्का दुक्का दुकानों को छोड़कर कस्बे के मेन बाजार में अधिकांश दुकानें खुली रही। इस संबंध में कुछ व्यापारियों से वार्ता करने का प्रयास किया गया, मगर व्यापारी कोई संतोष जनक जवाब नहीं दे पाए। उनका कहना था कि बंद को लेकर कहीं से कोई दिशा निर्देश नहीं मिले थे। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के नगराध्यक्ष निर्दोष जैन ने बताया कि कुछ व्यापारियों से संपर्क किया गया था, मगर बंद को लेकर कोई सहयोग नहीं मिला। उधर, बंद को लेकर पुलिस चौकन्नी रही और सीओ सदर रिजवान अहमद व इंस्पेक्टर विजय सिंह मय पुलिस फोर्स के लगातार कस्बे में भ्रमण करते रहे।
खादर में संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका से ग्रामीण भयभीत
पुरकाजी। कई दिनों तक आए उत्तराखंड से पहाड़ों के पानी से खादर क्षेत्र के ग्रामीणों का जनजीवन कई दिनों तक प्रभावित रहा है। वहीं, अब ग्रामीण जंगलों में जमा पानी में दुर्गंध आने से संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
उत्तराखंड में हुई लगातार बारिश का पानी पुरकाजी के खादर क्षेत्र में छोड़ा गया था, जिससे खादर क्षेत्र में कई कई फीट पानी भर जाने से भदौला,पांचली, रजगल्लापुर, मारकपुर, रामनगर, रतनपुरी, अलमावाला, जिंदावाला ,सुहैली आदि गांवों के ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। रास्तों पर पानी आ जाने से बंद हुए आवागमन को लेकर ग्रामीण अपने घरों में कैद होकर रह गए थे। हफ्तों बाद पानी कम होने से जहां ग्रामीणों का जन जीवन सामान्य होने की तरफ को है, वहीं जंगलों में रुके हुए पानी में दुर्गंध फैलने से ग्रामीण भयभीत नजर आ रहे हैं। जानवरों के लिए चारे की विकट समस्या खड़ी हो गई है। इसके अलावा रास्ते पर पानी रुका होने के कारण ग्राम रजगल्लापुर, रामनगर व रतनपुरी के ग्रामीणों को अब भी नाव में बैठकर रास्ता पार करना पड़ रहा है। ग्रामीण राजू प्रजापति, कुलवंत सिंह, देविंद्र सिंह गुरमीत सिंह, राजेंद्र पांचली, ज्ञानी जसविंद्र सिंह, सतनाम सिंह, टहल सिंह, रजनीश, साधुराम, बिजेंद्र सिंह, ब्रजपाल आदि का कहना है कि जानवरों को मात्र भूसा ही मिल पा रहा है, जिससे जानवर कमजोर हो गए हैं। इस संबंध में बाढ़ चौकी पर तैनात लेखपाल सोमनाथ का कहना है कि जानवरों के चारे के लिए तो प्रशासन के पास कोई बजट नहीं हैं।