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अभिमान से भक्ति नष्ट हो जाती है-प्रणव पुरी महाराज

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अभिमान से भक्ति नष्ट हो जाती है
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मुजफ्फरनगर। नवीन भारती शिशु उपवन इंटर कॉलेज प्रेमपुरी में चल रही श्रीराम कथा में कथा वाचक प्रणव पुरी महाराज ने नारद मुनि के अभिमान की कथा का वर्णन किया।
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कथा वाचक ने कहा कि भगवान सदैव अपने भक्तों पर कृपा करते हैं। भगवान भावना के अनुरूप ही दर्शन देते हैं। उन्होंने रावण को भी दर्शन दिए, नारद जी को दर्शन दिए। भगवान श्री हरि ने राम अवतार में मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में अवतार लिया। भगवान के बाल रूप के दर्शन करने के लिए देवता भी अनेक रूप धारण कर अयोध्या पधारे थे तथा बाल लीलाओं का आनंद लिया। नारद जी ने कठोर तपस्या की, उन्हें अहंकार हो गया कि मैंने काम व क्रोध को अपने वश में कर लिया है। भगवान ने लीला रचकर उनको अहंकार के कारण होने वाले पतन से बचाया। पुरुषोत्तम श्रीराम ने भक्त निषाद, शबरी को दर्शन देकर उनका उद्धार किया। कथा में ब्रह्मा स्वरूप सिंघल, बसंत, इंजीनियर आरएन यादव, सुभाषचंद्र शर्मा, रेखा गुप्ता, विनोद कुमार मित्तल आदि उपस्थित रहे।
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