भागवत पीठ शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि बुजुर्गों की सेवा करना धर्म है। जिंदगी की आपाधापी में वृद्ध माता-पिता के प्रति श्रद्धा और सेवा के कर्तव्य को नहीं भूलना चाहिए।
महर्षि शुकदेव बाल विद्या मंदिर बिहारगढ़ इलाहाबास में बुधवार को शिक्षण कक्ष के उद्घाटन समारोह में स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि बच्चों में नैतिक शिक्षा और संस्कारों को प्रवाहित करें। जरूरतमंदों की सेवा और सदकर्म के कार्यों में दान के लिए तत्पर रहें। तन, मन, धन, वचन तथा कर्म से गरीबों की सेवा करना सच्चा धर्म है। शुकतीर्थ में अपना घर संस्था के निर्माण से बुजुर्गों की सेवा का अवसर मिलेगा। ज्योतिषाचार्य प्रमोद मुनि ने कहा कि परोपकार की भावना पुण्य की राह दिखाती है। अपना घर संस्थापक विनोद गोयल, प्रबंधक नरेश कुमार जैन, कृष्णपाल आचार्य, आचार्य गिरीशचंद उपरेति, प्रधानाचार्य अरुण कुमार आदि ने विचार रखे। इससे पूर्व छात्रा पूजा, कोमल, सुंदरी, कविता, छवि ने स्वागत गीत एवं सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव जी महाराज के चित्र पर पुष्पाजंलि अर्पित की गई। छात्र-छात्राओं को स्वामी ओमानंद सरस्वती ने ड्रेस एवं बैग वितरित किए। प्रधान बुद्ध सिंह चौहान, पूर्व प्रधान महक सिंह, सोनम, जयभगवान बंसल, गोपाल सिंघल, राजकुमार गुप्ता, पायल आदि मौजूद रहे।