भागवत भक्ति का सागर: ओमानंद
मोरना (मुजफ्फरनगर)।
भागवत पीठ शुकदेव आश्रम शुक्रताल में संत-महात्माओं के परम सानिध्य में पोथी यात्रा का शुभारंभ हुआ। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत मानव के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।
मंगल और प्रभु गीतों के साथ देशभर से आए संतों के पावन सानिध्य में भागवत पोथी यात्रा शुकदेव आश्रम परिसर में निकाली गई। शुभारंभ अवसर पर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत भगवान कृष्ण का शब्दाबतार है। भागवत जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी है, भगवान वेदव्यास जी के ह्दय से निकली हुई अमृत वाणी है। जीवन में सकारात्मक, रचनात्मक दृष्टिकोण पैदा करती है। भागवत भक्ति का सागर है। भागवत का ज्ञान लोक-परलोक सुधार कर पापों को नष्ट करता है। भागवत प्रभु भक्ति और परमार्थ की शिक्षा देकर सुखी जीवन जीने की कला सिखाती है। कथा व्यास चिन्मयानंद मिशन के प्रसिद्ध संत श्री प्रथमेशनंद जी महाराज ने कहा कि महर्षि शुकदेव मुनि की तपोभूमि में भागवत कथा श्रवण से जीवन को पापों से मुक्ति मिलती है।
सद्कर्मों की प्राप्ति के लिए आत्मानुकूल धर्मानुरागी बने। जीवन ही धन्य नहीं होगा, बल्कि संतान और परिवार पर भी ईश्वर कृपा बरसेगी। स्वामी चिदरूपानन सरस्वती ने कहा कि जीवन मे पुण्य कर्म ही सबसे बड़ी संपदा है। अमृतसर, पंजाब से पधारे यज्ञमान जेएल गुप्ता तथा संजय शर्मा ने विधि विधान से पूजन कराया। भागवत भक्तों ने वीतराग स्वामी कल्याणदेव जी महाराज के समाधि मंदिर में चरण वंदना की। राघवेंद्र ब्रह्मचारी, सुमन कृष्ण शास्त्री, श्यामचार्य आदि मौजूद रहे।