अब तक 50 से अधिक मुकदमों में हो चुके हैं आरोपी बरी
मुजफ्फरनगर। गांव कवाल के सचिन-गौरव के कत्ल के मामले में सात मुजरिमों को हुई आजीवन कारावास व अर्थदंड की सजा सितंबर 2013 में हुए दंगे का यह पहला मामला है, जिसमें नामजदों को सजा सुनाई गई है। इससे पहले कोर्ट में हुई सुनवाई के 50 से अधिक मुकदमों में आरोपी बरी हो चुके हैं।
सात सितंबर 2013 में बहुचर्चित कवाल कांड के बाद जिले में भड़के दंगे में कुल 550 से अधिक मुकदमे दर्ज कराए गए थे, जिनमें छह हजार से अधिक लोग आरोपी बनाए गए थे। बाद में दंगों की जांच के लिए शासन द्वारा गठित एसआईसी ने कुल 175 मुकदमों में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी, जिनमें कुल 1480 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट में जिन मुकदमों में चार्जशीट दाखिल की गई थी, उनमें 50 मुकदमे कवाल कांड समेत अन्य हत्या, रेप आदि से संबंधित थे, जबकि शेष 125 दंगे के दौरान हिंसा, तोड़फोड़, आगजनी, पथराव व अन्य मामलों के थे। सूत्रों के अनुसार अब तक कोर्ट में दंगे के कुल 50 से अधिक मुकदमों में सुनवाई पूरी हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश में आरोपी बरी हो चुके हैं। ऐसे में दंगे का यह पहला ऐसा मामला है, जिसमें आरोपियों को सजा सुनाई गई है। वहीं, 95 मुकदमों को शासन से वापसी लेने की मांग की गई है, इनमें से 38 मुकदमे शासन द्वारा वापस लिए जाने की भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
सजा मिलने के बाद गुमसुम पहुंचे जेल
मुजफ्फरनगर। सचिन-गौरव की बर्बर हत्या में आजीवन कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाए जाने के बाद छह मुजरिमों को कड़ी सुरक्षा में जेल ले जाया गया, जबकि मुजम्मिल को वापस बुलंदशहर जेल भेज दिया गया। जेल अफसरों के अनुसार, जिला कारागार में सजा मिलने के बाद पहुंचे सभी मुजरिमों को अलग-अलग बैरकों में रखा गया है। कोर्ट से सजा मिलने के बाद जेल पहुंचे सभी मुजरिम गुमसुम ही रहे। जेल पहुंचने के बाद सभी आरोपियों को अलग-अलग बैरकों में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है।