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%अंग्रेजों ने समाज को विखंडित किया%

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मुजफ्फरनगर। श्रीराम कॉलेज में चल रहे आचार्यकुल के राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन वक्ताओं ने अहिंसक समाज संरचना में गांधी-विनोबा के योगदान पर विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति में समाज को सर्वोपरि माना गया है, लेकिन अंग्रेजों ने इसे विखंडित कर दिया। धैर्य, सम्मान, संयम और सहनशक्ति के बिना हिंसा पर काबू नहीं पाया जा सकता है। वर्तमान में संकल्पित हिंसा बढ़ रही है।
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शुभारंभ मुख्य अतिथि डीएम जीएस प्रियदर्शी, राजेश द्विवेदी, चेयरमैन डॉ एससी कुलश्रेष्ठ, प्रांतीय अध्यक्ष होतीलाल शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। डीएम जीएस प्रियदर्शी ने कहा कि विनोबाभावे का यह दर्शन था कि समाज में अमीरी-गरीबी के फर्क को मिटाया जाए। जिससे समाज में समानता की भावना उत्पन्न हो सके। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी एवं विनोबा भावे के पद चिन्हों पर चलकर युवा पीढ़ी आगे बढ़े। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हीरालाल श्रीमाली ने कहा कि हिंसा क्या है ? इसको जाने बिना अहिंसा को नहीं समझा जा सकता है। संकल्पित हिंसा को रोकने के लिए संयम, सम्मान, सहनशक्ति, सहयोग, श्रद्धा, निष्ठा आदि का होना बहुत जरूरी है। व्यवस्था परिवर्तन आंदोलन के संस्थापक बजरंग मुनि ने कहा कि भारतीय संस्कृति में समाज को सर्वोपरि माना गया है। इसके बाद अंग्रेजों ने राज्य को सर्वोपरि मानकर समाज को विखंडित कर दिया। आज समाज के ठेकेदारों ने समाज को धर्म के नाम पर ठगना शुरू कर दिया है। जिस कारण आज समाज की परिभाषा ही बदल चुकी हैं।
प्रांतीय अध्यक्ष होतीलाल शर्मा ने कहा कि हिंसा समाज और देश के साथ-साथ व्यक्ति के अस्तित्व को भी खंडित करती है। हमें महात्मा गांधी और विनोबा जी के बताए मैत्री, प्यार, समर्पण के रास्ते पर चलना होगा। कार्यक्रम के अध्यक्ष राजेश द्विवेदी ने कहा कि आज हम जिस स्वतंत्रता का स्वाद चख रहे हैं वह सब महान विभुतियों द्वारा किए गए संघर्षों की ही देन है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनोद, आचार्य पंकज व आचार्य किशोर, वरधा, हृदयनारायण भट्ट आदि ने भी विचार रखे। संचालन आलोक गुप्ता ने किया। देवेंद्र चौधरी, कोर्डिनेटर डॉ प्रेरणा मित्तल, नीतू सिंह, बिन्नू पुंडीर, वैशाली गर्ग, रुपल मलिक, प्राची श्रीवास्तव, रुचि श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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