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Muzaffarnagar News: 50 लाख रुपये बीघा मुआवजा, एक व्यक्ति को मिले सरकारी नौकरी

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मुजफ्फरनगर। पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों में बेचैनी है। किसानों ने भूमि के एवज में उचित मुआवजा और क्षतिपूर्ति की मांग की है। उन्होंने परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग उठाई।
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अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने किसानों की आपत्तियों पर सुनवाई की। किसानों ने ट्यूबवेल और खड़े पेड़ों के लिए भी क्षतिपूर्ति मांगी है। शासन ने पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे (शामली-खेड़ी फेस 1) के लिए भूमि अर्जित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह एक हाई स्पीड एक्सप्रेस नियंत्रित कॉरिडोर है। विभिन्न गांवों में अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के संबंध में आपत्तियों के निस्तारण के लिए अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को नियुक्त किया गया है। मंगलवार को अधिग्रहण के दायरे में आ रहे चरथावल और गांव मिर्जापुर उर्फ शाहजहांपुर के किसानों की आपत्तियों पर सुनवाई हुई। फलौदा और बधाई गांव के किसानों ने भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
-परिवार के एक सदस्य को मिले सरकारी नौकरी
चरथावल के किसान भारत भूषण त्यागी ने कहा कि उनकी करीब आठ बीघा भूमि अधिग्रहण के दायरे में आ रही है। कहा कि उनकी मांग है कि भूमि के एवज में 50 लाख रुपये प्रति बीघा मुआवजा और परिवार के एक सदस्य सरकारी नौकरी दी जाए।
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-भूमि अधिग्रहण के एवज में बाजार दर पर मिले मुआवजा
गांव बधाई कला निवासी किसान मनीष मलिक ने बताया कि उनकी सात बीघा भूमि अधिग्रहण के दायरे में आ रही है। उन्होंने कहा कि भूमि की बाजार दर 15 लाख रुपये प्रति चल रही है। उन्हें उसका चार गुना दाम मिलना चाहिए।

-मुआवजे के साथ मिले क्षतिपूर्ति, सर्विस रोड दें
किसान अरविंद का कहना है कि बाजार दर पर मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि आपत्ति लगाते हुए उन्होंने अधिग्रहण के एवज में प्रचलित दर का चार गुना दाम दिए जाने की मांग की।
-50 से 60 साठ लाख प्रति बीघा मिले मुआवजा
घिस्सुखेड़ा के किसान प्रमोद कुमार का कहना है कि उनकी मांग है कि भूमि का मुआवजा 50 से 60 लाख रुपये प्रति बीघा मिलना चाहिए। उनके खेतों के आसपास तीन सरकारी नाली हैं, सभी पर अंडरपास की व्यवस्था होनी चाहिए।
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