एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद उपजे विरोध में जमकर हिंसा हुई। शहर में दलित संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं और युवकों ने खूब उपद्रव किया था। हिंसक प्रदर्शन के कारण बाजार बंद रहे। दहशत और खौफ के चलते 48 घंटे बाद बाजार में ग्राहकों की आमद बढ़ने से रौनक लौट सकी है। तीसरे दिन दुकानों पर ग्राहक जरूर पहुंचे, मगर पहले के मुकाबले में खरीदारी कम रही।
आंदोलन में हुई अराजकता के कारण बाजार, पेट्रोल पंपों के साथ स्कूलों के दरवाजों पर भी ताले लटक गए थे। उपद्रवियों ने कई गिरोह बनाकर गुरिल्लावार में जगह-जगह हमले किए। पुलिस दंगाइयों की नीति को सही ढंग से नहीं समझ सकी।
ऐसे में एक जगह पुलिस बल पहुंचती तो दूसरी जगह हिंसा भड़क उठती। दाल मंडी, बिंदल मार्केट, झांसी की रानी चौक, चर्च मार्केट के साथ कोर्ट रोड पर बलवालियों ने डंडे के जोर पर दुकानों को बंद कराया। उपद्रवियों की भीड़ के आगे व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों को बंद करने में भलाई समझी।
बलवे की दहशत दूर तक गई और देहात के लोग भी शहर में आने में हिचकिचा गए। इसके चलते बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। उपद्रव के 48 घंटे बाद बाजार में रौनक लौट सकी है। बुधवार को बाजार में ग्राहकों की भीड़ तो रही, लेकिन आम दिनों के मुकाबले कारोबार कम रहा। गांव-देहात से तीसरे दिन लोगों ने बाजार का रुख किया।
विरोध सही, लेकिन तोड़फोड़ आगजनी गलत
सुपर मार्केट अध्यक्ष कादिर गौर ने कहा कि एक्ट में बदलाव का विरोध तो सही है, आंदोलन करते और अपनी बात को प्रशासन के माध्यम से सरकार तक पहुंचानी चाहिए थी, यह तोडफ़ोड़, आगजनी करना गलत है। यह सर्व समाज के लिए नुकसानदायक है।
-सदर बाजार कारोबारी विजेंद्र गोयल ने कहा कि भीड़ हाथों में डंडे लेकर दुकानें बंद कराती चली गई। वह तो यह भी नहीं समझ पाए हुआ क्या है। विरोध, प्रदर्शन करना था तो कानून के दायरे में करना चाहिए था।
व्यापारी बिजेंद्र धीमान ने कहा कि शहर में हुए उपद्रव के कारण लोगों में दहशत है, इससे ग्रामीण क्षेत्रों से ग्राहक शहर आने में डर रहे हैं। बुधवार को एक्का-दुक्का ग्राहक आए। थोड़ा-थोड़ा कारोबार पटरी पर दिखाई पड़ा है।