लिंग परीक्षण के आरोपी जेल भेजे
चरथावल (मुजफ्फरनगर)।
हरियाणा में भ्रूण परीक्षण करने के खिलाफ गठित टीम की सक्रियता से जिले के स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर हुई है। रोहतक जिले की पीसीपीएनडीटी टीम के स्टिंग ऑपरेशन में चरथावल क्षेत्र में मोबाइल मशीन से अवैधानिक तरीके से महिलाओं का भ्रूण परीक्षण करने वाले दोनों आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजवा दिया। पुलिस ने अप्रशिक्षित युवकों द्वारा प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण करने का अपराध करने में धारा 15 का इजाफा किया है।
चरथावल के अकबरगढ़ में एक मकान में पोर्टेबल मशीन से गर्भवती महिलाओं का परीक्षण करने वाले युवक बेहद चालाक है। वह घुमंतू तरीके से महिलाओं को चेकअप करने की कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखते थे। उन्होंने इस गांव में ग्रामीणों को सरकारी योजनाएं दिलाने की बात कहकर मकान किराए पर लिया था। उसके बाद उनका नेटवर्क हरियाणा प्रांत के अलावा आसपास के जिले में फैला हुआ था। कैथल के गांव कानौदा निवासी सुभाष हरियाणा से दलाल चरथावल के शाह आलम का दलाल था। वह ग्राहकों को कमीशन के आधार पर लाकर चेकअप कराता था। इसके अलावा पूछताछ में आरोपी शाह आलम ने जिससे मशीन खरीदना बताया गया है, वह तल्हेड़ी का एक डॉक्टर है। हालांकि लिंग परीक्षण करने की पोर्टेबल मशीन को रखने का अधिकार उन्हें भी नहीं मिल सकता था। यही वजह थी कि पुलिस द्वारा बरामद की गई अल्ट्रासाउंड मशीन का सीरियल नंबर मॉडल आरोपी ने मिटा रखा था। पुलिस ने जिस अल्ट्रासाउंड मशीन से लिंग परीक्षण किया है, दोनों पूरी तरह मेडिकल अनट्रेंड और मात्र इंटर पास है। मेडिकल प्रैक्टिस करने का अधिकार नहीं होने के कारण शाह आलम के खिलाफ पीसीपीएनडीटी की धारा 15 बढ़ाई गई है। इसके अलावा साजिश तल्हेड़ी के चिकित्सक द्वारा रचने और धोखाधड़ी कर गर्भवती महिलाओं का भ्रूण परीक्षण करने का आरोप भी लगे है। पुलिस ने मंगलवार को दोनों को जेल भेज दिया। दूसरी ओर, लोगों की जुबां सवाल है कि यूपी में भी पीसीपीएनडीटी गठित है, तो यहां भ्रूण परीक्षण के लिए नोडल अधिकारी नियत है, जबकि हरियाणा टीम यहां आकर कार्रवाई करती है। जिले की टीम हाथ पर हाथ धरे बैठी है। यह बात अलग है कि हरियाणा में बेटियों का अनुपात कम होने से भ्रूण परीक्षण में सख्ती है। हालांकि प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में मोबाइल मशीन से भ्रूण परीक्षण करने वालों का नेटवर्क स्वास्थ्य विभाग के लिए करारा सबक है। सीएमओ डॉ. पीके मिश्रा ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद कोर्ट में चला गया है। पकड़े गए युवक कोई मेडिकल प्रैक्टिसनर नहीं है। विभाग इससे ज्यादा कोई कार्रवाई नहीं कर सकता।