रेलवे संरक्षा आयुक्त की फाइनल आख्या जेई प्रदीप कुमार का भाग्य तय करेगी। फिलहाल जेई को ही इस भीषण हादसे का मुख्य जिम्मेदार ठहराया गया है। रेलवे बोर्ड के अधिकारी प्रकरण में फाइनल रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारियों से भी कई बार पूछताछ की जा चुकी है। उधर, हादसे के छह माह बाद खतौली में दुर्घटनास्थल पर ट्रेनों ने गति पकड़ी है। अब यहां पर ट्रेनों को नॉर्मल स्पीड से गुजारा जा रहा है।
19 अगस्त की शाम 5.45 बजे पुरी से हरिद्वार जा रही उत्कल-कलिंग एक्सप्रेस ट्रेन हादसे का शिकार हो गई थी। खतौली में रेलवे लाइन पर जेई प्रदीप कुमार गैंगमैनों की टीम के साथ टूटे ट्रैक की मरम्मत कर रहे थे। चूक यह थी कि कंट्रोल सेक्शन से कोई ब्लॉक नहीं लिया गया। नतीजतन 110 की स्पीड से गुजर रही उत्कल एक्सप्रेस भीषण हादसे की भेंट चढ़ गई थी। ट्रेन के 14 डिब्बे धड़ाधड़ कर एक दूसरे के ऊपर चढ़ गए थे। भयंकर हादसे में 19 यात्रियों की तत्काल मृत्यु हुई थी, जबकि 90 से अधिक घायल हो गए थे। बाद में मेरठ, गाजियाबाद और मथुरा में उपचार के दौरान सात यात्रियों ने दम तोड़ दिया था। इस प्रकरण में तत्काल रेलवे बोर्ड ने रेलवे संरक्षा आयोग के आयुक्त एसके पाठक को जांच करने की मुख्य जिम्मेदारी दी थी। पिछले छह माह से संरक्षा आयुक्त इसकी जांच करने में जुटे हैं। रेलवे बोर्ड ने 12 कर्मचारियों को तो राहत दे दी है, जबकि मुख्य आरोपी बनाए गए जूनियर इंजीनियर (रेलपथ) प्रदीप कुमार को निष्कासित ही रखा है। आयुक्त की रिपोर्ट पर जेई प्रदीप कुमार का भाग्य टिका है। सूत्रों के अनुसार मार्च माह में ही भीषण हादसे की फाइनल रिपोर्ट मंत्रालय को मिल सकती है। उसके बाद रेलवे बोर्ड जेई के विरुद्ध कार्रवाई जारी करेगा। फिलहाल उसे बर्खास्त रखा गया है।
हादसे के बाद नजर नहीं आए कर्मचारी
मुजफ्फरनगर। हादसे के दौरान गैंगमैन, लोहार अपने औजार और गैस कटर, चॉबी-पाने मौका-ए-वारदात पर छोड़कर फरार हो गए थे। इसके अलावा ट्रॉली आदि भी पाई गई थी। हादसे के बाद कर्मचारी छह माह में एक बार भी खतौली स्टेशन या सेक्शन में नजर नहीं आ सके हैं।
ट्रैक पर कोई समस्या नहीं
मुजफ्फरनगर। खतौली स्टेशन मास्टर राजेंद्र कुमार ने बताया कि उत्कल हादसे के बाद ट्रेनों की गति पर ब्रेक रखा गया था। पहले यहां से 10, 20, 30, 50 और 75 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से गाड़ियां निकाली गई। अब नॉर्मल स्पीड रखी गई है। हालांकि डबल ट्रैक से सिंगल ट्रैक पर आने के लिए ट्रेनों को टर्न करना होता है, जिसके चलते फिलहाल यहां पर ट्रेन की स्पीड कम रखी जा रही है।