चौधरी चरण सिंह स्पोर्ट्र्स स्टेडियम की पिच गेंदबाज और बल्लेबाज दोनों के लिए मुफीद है। सुबह बल्लेबाज को खेलने में आसानी होगी तो तापमान बढ़ने पर पिच गेंदबाज की ओर झुकाव करेगी। स्पिनर और मीडियम पेसर गेंदबाज के लिए पिच अधिक फायदा पहुंचाएगी, जबकि तेज गेंदबाज को थोड़ी मुश्किल खड़ी करेगी। हालांकि बल्लेबाज को दोपहर के समय अधिक पसीना बहाना पड़ेगा।
स्टेडियम में दिसंबर माह (4 से 12 तक) सेना भर्ती का आयोजन किया गया। स्टेडियम में आठ दिन के भीतर करीब 30 हजार युवकों ने दौड़ लगाई। इसके लिए 1600 मीटर का ट्रैक बना था। सेना भर्ती के बाद से उखड़ी पिच और घास को बनाने के लिए स्टेडियम प्रशासन ने कड़ी मशक्कत उठाई। घास के लिए यूरिया डाला तो सुबह और शाम में पानी का छिड़काव कर मैदान को खेल के लिए मुफीद बनाया गया। स्टेडियम में दो जनवरी से कूच विहार ट्रॉफी का मैच खेला जाना है, जिसके लिए यूपी और एसोसिएट एंड एफिलिएट की टीम खेलेंगी। स्टेडियम में उगी घास और सपाट पिच गेंदबाज और बल्लेबाज दोनों के लिए बेहतर है, लेकिन यह समय-समय पर उपयोगी रहेगी। चार दिन चलने वाले कूच बिहार ट्रॉफी के आखिरी लीग में टीमों को दो-दो इनिंग खेलनी है। खास यह है कि सुबह के वक्त स्टेडियम में ओस रहेगी, जिसमें बल्लेबाज को पिच लाभ पहुंचाएगी। तेजी से रन बनाने के साथ बल्लेबाज करे सामने गेंद टर्न नहीं पाएगी। वहीं, जैसे-जैस तापमान बढ़ेगा और ओस हटना शुरू होगी तो पिच गेंदबाज के पक्ष में रहेगी। वैसे स्टेडियम की पिच पर स्पिनर और मीडियम पेसर को अधिक लाभ मिलेगा, क्योंकि सख्तनुमा और सपाट पिच पर गेंदबाज बल्लेबाज को चकमा देने में काफी हद तक सफल रहेगा। सुबह करीब साढ़े नौ बजे से इनिंग शुरू होगी। पहला स्पेल ढाई घंटे का रखा गया है, बाकी डेढ़ और दो घंटे हैं। कुल मिलाकर करीब 6 घंटे का टाइम है। जिसमें एक टीम को 90 ओवर फेंकने हैं। शनिवार को स्टेडियम प्रशासन और क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने पिच की मरम्मत के साथ मार्किंग की है। ताकि खेल शुरू होने के बाद टीमों को कोई परेशानी नहीं उठानी पड़े। एमसीए के सचिव मनोज पुंडीर ने बताया कि ट्रॉफी के मैच के लिए स्टेडियम में सभी तैयारियों को पूरा किया जा रहा है। दोनों टीमें स्टेडियम पहुंच गई हैं। पिच के साथ अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया गया है।