उमस भरी गर्मी में सब्र से काम लेकर रोजेदार अल्लाह की इबादत करें। चरथावल के कारी नौशाद कहते हैं कि रोजा इंसान को गुनाहों से बचाता है। रोजेदार गुस्से को त्याग कर सौहार्द के साथ दिन बिताते हैं। रोजेदार पाक दामन से झगड़ा फसाद से परहेज करते हैं।
जामा मस्जिद के मौलवी कासिम फरमाते है कि तकरीबन 16 घंटे तक रोजा रखना अल्लाह के हुक्म की पाबंदी है। सुबह से शाम तक प्यार, मोहब्बत और भाईचारे के साथ दिन बिताते हैं। वहीं, करीब ढाई दशक से नियमित रोजा रख रहे मौहम्मद तनवीर अहमद बताते है कि पाक महीना है। इंसान बुराइयों से दूर रहकर अच्छाइयों पर अमल करता है। पूर्व सभासद अमीर जहां पिछले तीन दशक से रोजा रखती आ रही हैं। कहती हैं कि बुरी बातों से बचना भी रोजा है। इन दिनों किसी के बारे में बुरा नहीं सोचे ना चुगली करें, झूठ नहीं बोले और ना गीबत करें। वहीं, रमजान महीने में जुमे को लेकर मुस्लिम समाज के लोगों में बड़ा उत्साह रहता है। जुमे की नमाज के लिए कस्बे की जामा मस्जिद, डूम वाली, डेरे वाली, तकिया वाली, चुपाड़ वाली एवं देहात की मस्जिदों में भारी तादात में अकीकदमंद मुल्क की खुशहाली के लिए दुआ करते है।