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खूब खेलें होली, रंगों से रहे सावधान

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बाजारों में केसरिया रंग की डिमांड अधिक
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मुजफ्फरनगर। रंगों से होली खेलना सेहत के लिए खतरनाक है। बाजार में केमिकलयुक्त रंगों की भरमार है। यह रंग आंख और चेहरे के लिए नुकसानदायक है। मामूली सी चूक आंखों के साथ अन्य अंगों को ठेस पहुंचा सकती है। चिकित्सकों के मुताबिक केमिकल वाले रंग होली खेलने के बाद कई तरह की बीमारियां पनपती है।
होली पर्व को लेकर बाजार सज गए हैं। पिचकारियों से लेकर गुब्बारे और रंगों की बिक्री प्रारंभ हो गई है। बाजार में तमाम तरह के गुलाल के उपलब्ध है। इनमें सबसे अधिक केसरिया रंग की मांग है। केमिकलयुक्त रंगों की बाजार में बिक्री अधिक है। होली पर रंगों के की मस्ती में सेहत का भी ख्याल रखें। केमिकल, सिंथेटिक रंगों से स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय के नेत्र चिकित्सक डॉ मनोज कुमार सैन ने कहते हैं कि होली पर्व पर सबसे ज्यादा खतरा आंखों को रहता है। आंखों में केमिकल रंगों के गिरने से रेटीना प्रभावित होता है। आंखों की रोशनी भी जा सकती है।
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खाज-खुजली होना भी खतरा
मुजफ्फरनगर। जिला चिकित्सालय के सर्जन डॉ योगेंद्र त्रिखा ने बताया कि पिछले कई सालों से बाजार में सिंथेटिक रंग अधिक है। इनका चलन बच्चों से लेकर बड़ों तक देखने को मिल रहा है। होली के बाद बड़ी संख्या में खाज-खुजली और पेट दर्द आदि रोगी पहुंचते हैं। एलर्जी होने का भी खतरा है। ऐसे में साफ है कि केमिकलयुक्त रंगों से बचे और दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करेंगे।
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टेशू के फूलों से खेलें होली
मुजफ्फरनगर। चिकित्सकों के अनुसार टेशू के फूलों से होली पर्व मनाएं। टेशू के फूलों को रातभर पानी में डूबाकर रखे हैं और सुबह होली खेलें। यह पानी प्राकृतिक है, जो शरीर और आंखों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।

ऐसे बरते सावधानी
आंखों पर चश्मा लगाकर होली खेलें।
आंखों में रंग गिरने पर साफ पानी धोएं।
आंखों की मालिस न करे, इससे जलन बढ़ेगी।
चेहरे पर लगे रंग को धोने के लिए गर्म पानी का प्रयोग करें।
रंग लगे हाथों से कोई वस्तु न खाएं और खिलाएं।
रेत से बने रंगों से होली न खेलें।
हर्बलयुक्त रंगों का प्रयोग करे।
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