लोक-परलोक को सुधारती है भागवत: ओमानंद
मोरना (मुजफ्फरनगर)। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत लोक-परलोक को सुधारती है। पापों का नाश कर मनुष्य को भक्ति के शिखर पर ले जाती है। जीवन में सद्गुणों का धारण करें।
शुकदेव आश्रम में कथा व्यास राम विलास आचार्य जी महाराज की भावगत कथा का शुभारंभ विधि विधान से स्वामी ओमानंद सरस्वती ने किया। स्वामी ने कहा कि भागवत प्राणी मात्र के मन में भक्ति का स्थायी सृजन करती है, सत्य मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। विषम परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करनी की शक्ति भागवत के श्रवण से मिलती है। तनावमुक्त जीवन के लिए सहज और सरल बने। भागवत भारतीय जीव और संस्कृति का प्राण है। भागवत रजोगुण, तमोगुण का नाश कर सत्वगुण की वृद्धि करती है। लक्ष्मण गण नागरिक परिषद कोलकत्ता से पधारे भागवत श्रद्धालुओं ने स्वामी का अभिनंदन किया। सुमन शास्त्री, अचल शास्त्री, आचार्य गिरीशचंद उप्रेती, हर्ष मणि, आशीष माधव शास्त्री आदि मौजूद रहे। उधर, भागवत जन्म भूमि पर देश के अलग-अलग प्रांतों की पांच कथाएं चल रही हैं। कथा व्यास विश्वनाथ दास जी महाराज की कथा के यज्ञमान सहारनपुर वन सरंक्षक अनिल दूबे और हरिओम दूबे हैं। देवास मध्यप्रदेश से पधारे सोनी परिवार की कथा में कथा व्यास अनिल शर्मा ने भागवत के प्रसंगों की अमृत वर्षा की।